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एतो॒ न्विन्द्रं॒ स्तवा॑म॒ सखा॑य॒: स्तोम्यं॒ नर॑म् । कृ॒ष्टीर्यो विश्वा॑ अ॒भ्यस्त्येक॒ इत् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

eto nv indraṁ stavāma sakhāyaḥ stomyaṁ naram | kṛṣṭīr yo viśvā abhy asty eka it ||

पद पाठ

एतो॒ इति॑ । नु । इन्द्र॑म् । स्तवा॑म । सखा॑यः । स्तोम्य॑म् । नर॑म् । कृ॒ष्टीः । यः । विश्वाः॑ । अ॒भि । अस्ति॑ । एकः॑ । इत् ॥ ८.२४.१९

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:24» मन्त्र:19 | अष्टक:6» अध्याय:2» वर्ग:18» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:4» मन्त्र:19


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शिव शंकर शर्मा

वही स्तुत्य है, यह इससे दिखलाते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (सखायः) हे मित्रों ! (एतो) आओ (नु+इन्द्रम्+स्तवाम) सब मिलकर उस इन्द्र की स्तुति करें, जो (स्तोम्यम्) स्तुतियोग्य और (नरम्) जगन्नेता है, (यः+एकः+इत्) जो एक ही (विश्वाः+कृष्टीः+अभ्यस्ति) समस्त उपद्रवकारिणी प्रजाओं को दूर कर देता है ॥१९॥
भावार्थभाषाः - जिस कारण वही स्तुतियोग्य है और हमारे विघ्नों को भी दूर किया करता है, अतः वही सेव्य है ॥१९॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'स्तोम्य नर' प्रभु का स्तवन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सखायः) = मित्रो ! (एत उ) = निश्चय से आओ। (नु) = अब उस (स्तोम्यम्) = स्तुति के योग्य (नरम्) = हमें उन्नतिपथ पर ले चलनेवाले (इन्द्रम्) = सर्वशक्तिमान् प्रभु का (स्तवाम) = स्तवन करें। यह सम्मिलित प्रार्थना हमें प्रभु के अधिक और अधिक समीप लानेवाली हो। [२] हम उस प्रभु का स्तवन करें (यः) = जो (एकः इत्) = अकेले ही (विश्वः कृष्टीः) = सब मनुष्यों को (अभ्यस्ति) = अभिभूत करनेवाले हैं। हमारे सब शत्रुओं का पराजय ये प्रभु ही तो करेंगे।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम सब मित्र मिलकर प्रभु का स्तवन करें। प्रभु हमारे सब शत्रुओं का अभिभव करके हमें उन्नतिपथ पर ले चलेंगे।
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शिव शंकर शर्मा

स एव स्तुत्य इति दर्शयति।

पदार्थान्वयभाषाः - हे सखायः ! एतो=आगच्छतैव। नु=ननु। सर्वे मिलित्वा। स्तोम्यम्=स्तोमयोग्यम्। नरम्=जगन्नेतारम्। इन्द्रम्। स्तवाम। यः+एकः+इत्=यः एक एव। विश्वाः=सर्वाः। कृष्टीः=दुष्टाः प्रजाः। अभ्यस्ति=अभिभवति ॥१९॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Come friends all together and let us adore Indra, lord and leader worthy of joint worship and exaltation, who, by himself alone, rules over all peoples of the world.