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त्वया॑ ह स्विद्यु॒जा व॒यं चोदि॑ष्ठेन यविष्ठ्य । अ॒भि ष्मो॒ वाज॑सातये ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tvayā ha svid yujā vayaṁ codiṣṭhena yaviṣṭhya | abhi ṣmo vājasātaye ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

त्वया॑ । ह॒ । स्वि॒त् । यु॒जा । व॒यम् । चोदि॑ष्ठेन । य॒वि॒ष्ठ्य॒ । अ॒भि । स्मः॒ । वाज॑ऽसातये ॥ ८.१०२.३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:102» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:9» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:3


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वाजसातये

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (यविष्ठ्य) = बुराइयों को अधिकाधिक पृथक् करनेवाले प्रभो! (चोदिष्ठेन) = सदा सत्कर्मों के प्रेरक (त्वया) = आप (युजा) = साथी के साथ (वयम्) = हम (ह स्वित्) = निश्चय से (अभिष्मः) = शत्रुओं का अभिभव करनेवाले बनें। [२] काम, क्रोध, लोभ आदि शत्रुओं को पराजित करके हम (वाजसातये) = शक्ति की प्राप्ति के लिये हों। इन शत्रुओं को पराजित करके ही हम शरीर में शक्ति का रक्षण कर पाते हैं। इनका पराजय आपको मित्र बनाकर ही हुआ करता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - प्रभु के मैत्री से सत्कर्मों की प्रेरणा प्राप्त करते हुए हम शत्रुओं का पराजय करें और शक्ति का सम्पादन करनेवाले हों।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O most youthful catalytic power of evolution, only in obedience and association with you, highest inspiring spirit and power, shall we be able to move forward and win success in achieving knowledge, strength, wealth and honours of life.