देवता: अग्निः
ऋषि: प्रयोगो भार्गव अग्निर्वा पावको बार्हस्पत्यः ; अथवाग्नी गृहपतियविष्ठौ सहसः सुतौ तयोर्वान्यतरः
छन्द: गायत्री
स्वर: षड्जः
स न॒ ईळा॑नया स॒ह दे॒वाँ अ॑ग्ने दुव॒स्युवा॑ । चि॒किद्वि॑भान॒वा व॑ह ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
sa na īḻānayā saha devām̐ agne duvasyuvā | cikid vibhānav ā vaha ||
पद पाठ
सः । नः॒ । ईळा॑नया । स॒ह । दे॒वान् । अ॒ग्ने॒ । दु॒व॒स्युवा॑ । चि॒कित् । वि॒भा॒नो॒ इति॑ विऽभानो । आ । व॒ह॒ ॥ ८.१०२.२
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:102» मन्त्र:2
| अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:9» मन्त्र:2
| मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:2
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
ईडानया- दुवस्युवा [वेदवाचा]
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अग्ने) = अग्रेणी प्रभो ! (चिकित्) = आप सर्वज्ञ हैं। सो हे विभानो! विशिष्ट दीप्तिवाले प्रभो ! (सः) = वे आप (नः) = हमारे लिये (ईडानया) = स्तुति करती हुई, (दुवस्युवा) = परिचरणशील प्रभु की परिचर्या करनेवाली इस ज्ञान की वाणी के सह-साथ देवान् आवह सब दिव्य गुणों को प्राप्त कराइये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु हमें उस ज्ञान की वाणी को प्राप्त करायें, जिसके द्वारा हम स्तवन व प्रभु परिचर्या को कर पायें। इस वेदवाणी को प्राप्त कराने के द्वारा हमें दिव्य गुणों से युक्त जीवनवाला करें।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Agni, brilliant lord of omniscience, along with this reverent and worshipful voice of prayer and divine knowledge, bring us brilliant and generous divinities of nature and humanity.
