देवता: अग्निः
ऋषि: प्रयोगो भार्गव अग्निर्वा पावको बार्हस्पत्यः ; अथवाग्नी गृहपतियविष्ठौ सहसः सुतौ तयोर्वान्यतरः
छन्द: गायत्री
स्वर: षड्जः
तमर्व॑न्तं॒ न सा॑न॒सिं गृ॑णी॒हि वि॑प्र शु॒ष्मिण॑म् । मि॒त्रं न या॑त॒यज्ज॑नम् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
tam arvantaṁ na sānasiṁ gṛṇīhi vipra śuṣmiṇam | mitraṁ na yātayajjanam ||
पद पाठ
तम् । अर्व॑न्तम् । न । सा॒न॒सिम् । गृ॒णी॒हि । वि॒प्र॒ । शु॒ष्मिण॑म् । मि॒त्रम् । न । या॒त॒यत्ऽज॑नम् ॥ ८.१०२.१२
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:102» मन्त्र:12
| अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:11» मन्त्र:2
| मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:12
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
अर्वन्तं न, मित्रं न
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (विप्र) = अपना विशेषरूप से पूरण करनेवाले साधक ! तू (तम्) = उस (अर्वन्तं न) = [अव्] शत्रुओं का संहार करनेवाले के समान (सानसिम्) = सम्भजनीय (शुष्मिणम्) = शत्रु-शोषक बलवाले प्रभु को (गृणीहि) = स्तुत कर । प्रभु तेरे भी काम-क्रोध आदि शत्रुओं का संहार करेंगे और तुझे शक्ति प्राप्त करायेंगे। [२] उस प्रभु का तू स्तवन कर जो (मित्रं न) = एक पापों से बचानेवाले [प्रमीते: त्रायते] सखा के समान (यातयज्जनम्) = लोगों को उत्तम कर्मों में यत्नशील करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु का स्तवन करें। प्रभु हमारे वासनात्मक शत्रुओं का संहार करेंगे और हमें शक्ति देते हुए एक मित्र की तरह उत्तम कर्मों में प्रेरित करेंगे।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O vibrant scholar and dedicated yajaka, adore and sing in praise of Agni, victorious giver of wealth and success like an archer getting the target, powerful inspirer of humanity for action and advancement as a friend.
