देवता: अग्निः
ऋषि: प्रयोगो भार्गव अग्निर्वा पावको बार्हस्पत्यः ; अथवाग्नी गृहपतियविष्ठौ सहसः सुतौ तयोर्वान्यतरः
छन्द: निचृद्गायत्री
स्वर: षड्जः
त्वम॑ग्ने बृ॒हद्वयो॒ दधा॑सि देव दा॒शुषे॑ । क॒विर्गृ॒हप॑ति॒र्युवा॑ ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
tvam agne bṛhad vayo dadhāsi deva dāśuṣe | kavir gṛhapatir yuvā ||
पद पाठ
त्वम् । अ॒ग्ने॒ । बृ॒हत् । वयः॑ । दधा॑सि । दे॒व॒ । दा॒शुषे॑ । क॒विः । गृ॒हऽप॑तिः । युवा॑ ॥ ८.१०२.१
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:102» मन्त्र:1
| अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:9» मन्त्र:1
| मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:1
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
बृहद् वयः
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अग्ने) = अग्रेणी, (देव) = प्रकाशमय प्रभो ! (त्वम्) = आप (दाशुषे) = आपके प्रति अपना अर्पण करनेवाले पुरुष के लिये (बृहद् वयः) = वृद्धियुक्त आयुष्य (दधासि) = धारण करते हैं। जो भी आपके प्रति अपने को दे डालता है, इसे वह जीवन प्राप्त कराते हैं, जो सब दृष्टिकोणों से बढ़ा हुआ होता है। । [२] कविः = आप क्रान्तदर्शी है, सब विद्याओं का ज्ञान देनेवाले हैं। गृहपतिः - हमारे शरीररूप गृहों के रक्षक हैं। युवा - सदा बुराइयों को पृथक् करनेवाले व अच्छाइयों को हमारे साथ मिलानेवाले हैं [यु मिश्रणामिश्रणयोः] ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु के प्रति अपना अर्पण करें। प्रभु हमारे लिये वृद्धियुक्त दीर्घजीवन को प्राप्त कराते हैं। वे सब ज्ञानों को देनेवाले, शरीर गृहों के रक्षक व हमारी सब बुराइयों को दूर करके अच्छाइयों को हमारे साथ मिलानेवाले हैं।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - 1. ‘Agni, light of the world, brilliant giver of knowledge, you bear and bring abundant wealth and honour of the world for the generous devotee. You are ever young, eternal, omniscient poet creator, lord and master, ruler and sustainer of the house of the universe.$Agni, light of the world, brilliant giver of knowledge, you bear and bring abundant wealth and honour of the world for the generous devotee. You are ever young, eternal, omniscient poet creator, lord and master, ruler and sustainer of the house of the universe.
