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ते हि॑न्विरे अरु॒णं जेन्यं॒ वस्वेकं॑ पु॒त्रं ति॑सॄ॒णाम् । ते धामा॑न्य॒मृता॒ मर्त्या॑ना॒मद॑ब्धा अ॒भि च॑क्षते ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

te hinvire aruṇaṁ jenyaṁ vasv ekam putraṁ tisṝṇām | te dhāmāny amṛtā martyānām adabdhā abhi cakṣate ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ते । हि॒न्वि॒रे॒ । अ॒रु॒णम् । जेन्य॑म् । वसु॑ । एक॑म् । पु॒त्रम् । ति॒सॄ॒णाम् । ते । धामा॑नि । अ॒मृताः॑ । मर्त्या॑नाम् । अद॑ब्धाः । अ॒भि । च॒क्ष॒ते॒ ॥ ८.१०१.६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:101» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:7» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:6


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

एकं जेन्यं वसु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (ते) = वे गत मन्त्रों में वर्णित 'मित्र, अर्यमा व वरुण' (अरुणम्) = तेजस्वी [ॠ गतौ ] हमें गतिशील बनानेवाले, (जेन्यम्) = विजयशील (वसु) = धन को (हिन्विरे) = प्राप्त कराते हैं। जो वसु (एकम्) = अद्वितीय है। तथा (तिसृणाम्) = शरीर, मन व बुद्धिरूपी पृथिवी, अन्तरिक्ष व द्युलोक नामक तीनों लोकों का (पुत्रम्) = [पुनातित्रायते] पवित्र करनेवाला व त्राण करनेवाला है। [२] (अमृताः) = [न मृतं येभ्यः] मृत्यु से ऊपर उठानेवाले (अदब्धा:) = किसी से हिंसित न होनेवाले (ते) = वे मित्र, अर्यमा और वरुण (मर्त्यानाम्) = मनुष्यों के (धामानि) = तेजों का अभिचक्षते ध्यान करते हैं, रक्षण करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-स्नेह, संयम व निर्देषता के द्वारा हमारा जीवन पवित्र व सुरक्षित बना रहता है। इनसे हमारे शरीर, मन व बुद्धि का तेज कायम रहता है।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - They, Mitra, Varuna and Aryaman, love, judgement and will of divinity in nature, Aditi, bring forth, move and inspire the one, refulgent, victorious, shelter home of life, protector and illuminator of the three, heaven, earth and the middle regions, the sun, child of Aditi, and they, immortal, undaunted and invincible, all round watch and protect the homes and regions of the mortals.