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बट् सू॑र्य॒ श्रव॑सा म॒हाँ अ॑सि स॒त्रा दे॑व म॒हाँ अ॑सि । म॒ह्ना दे॒वाना॑मसु॒र्य॑: पु॒रोहि॑तो वि॒भु ज्योति॒रदा॑भ्यम् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

baṭ sūrya śravasā mahām̐ asi satrā deva mahām̐ asi | mahnā devānām asuryaḥ purohito vibhu jyotir adābhyam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

बट् । सू॒र्य॒ । श्रव॑सा । म॒हान् । अ॒सि॒ । स॒त्रा । दे॒व॒ । म॒हान् । अ॒सि॒ । म॒ह्ना । दे॒वाना॑म् । अ॒सु॒र्यः॑ । पु॒रःऽहि॑तः । वि॒ऽभु । ज्योतिः॑ । अदा॑भ्यम् ॥ ८.१०१.१२

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:101» मन्त्र:12 | अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:8» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:12


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

[देवानाम्] असुर्यः पुरोहितः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सूर्य) = सम्पूर्ण जगत् के उत्पादक प्रभो! आप (बट्) = सचमुच ही (श्रवसा) = ज्ञान के हेतु से (महान् असि) = महान् हैं, पूजनीय हैं। आपके पूर्ण ज्ञान के कारण आपका बनाया यह संसार भी पूर्ण है। हे (देव) = प्रकाशमय प्रभो! आप (सत्रा) = सचमुच ही महान् असि महान् हैं। [२] आप अपनी (मह्ना) = महिमा से (देवानां असुर्य:) = देवों के अन्दर प्राणशक्ति का सञ्चार करनेवाले हैं [असून् राति] और (पुरोहितः) = हितोपदेष्टा हैं। आप तो एक विभु व्यापक व (अदाभ्यम्) = अहिंस्य (ज्योतिः) = ज्योति हैं। आपके उपासक भी इस ज्योति से अपने जीवन को दीप्त कर पाते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु अपने ज्ञान के कारण महान् हैं, वे एक पूर्ण [न्यूनता शून्य] सृष्टि को जन्म देते हैं। अपनी महिमा से देवों के अन्दर प्राणशक्ति का सञ्चार करते हैं और उन्हें हितकर प्रेरणा देते हैं। प्रभु एक व्यापक अहिंस्य ज्योति हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Surya, lord self-refulgent, by honour and fame you are great. In truth, you are great, generous lord, by your grandeur among the divinities. Lord of pranic energy, destroyer of the evil, prime high priest of creation in cosmic dynamics, omnipresent and infinite, light unsurpassable, eternal.