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यु॒वं चि॒त्रं द॑दथु॒र्भोज॑नं नरा॒ चोदे॑थां सू॒नृता॑वते । अ॒र्वाग्रथं॒ सम॑नसा॒ नि य॑च्छतं॒ पिब॑तं सो॒म्यं मधु॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yuvaṁ citraṁ dadathur bhojanaṁ narā codethāṁ sūnṛtāvate | arvāg rathaṁ samanasā ni yacchatam pibataṁ somyam madhu ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यु॒वम् । चि॒त्रम् । द॒द॒थुः॒ । भोज॑नम् । न॒रा॒ । चोदे॑थाम् । सू॒नृता॑ऽवते । अ॒र्वाक् । रथ॑म् । सऽम॑नसा । नि । य॒च्छ॒त॒म् । पिब॑तम् । सो॒म्यम् । मधु॑ ॥ ७.७४.२

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ऋग्वेद » मण्डल:7» सूक्त:74» मन्त्र:2 | अष्टक:5» अध्याय:5» वर्ग:21» मन्त्र:2 | मण्डल:7» अनुवाक:5» मन्त्र:2


आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (युवं) हे विद्वानों ! तुम (चित्रं भोजनं) नाना प्रकार के भोजन (ददथुः) धारण=भक्षण करो। (नरा) सब प्रजाजन (सूनृतावते) सुन्दर स्तोत्रों में (चोदेथां) तुम्हें प्रेरित करें, ताकि तुम (अर्वाक् रथं) उनके सम्मुख उत्तम वेदवाणियों को (समनसा) अच्छे भावों से (नियच्छतं) प्रयोग करते हुए (सोम्यं) सुन्दर (मधु पिबतं) मीठे रसों का पान करो ॥२॥
भावार्थभाषाः - हे यजमानो ! तुम विद्वान् उपदेशकों को नाना प्रकार के भोजन और मीठे रसों का पान कराके प्रसन्न करो, ताकि वह सुन्दर वेदवाणियों का तुम्हारे प्रति उपदेश करें और वह तुम्हारे सम्मुख मानस यज्ञों द्वारा अनुष्ठान करके तुम्हें शान्ति का मार्ग बतलायें, जिससे तुम लोग परस्पर एक दूसरे की उन्नति करते हुए प्रजा में धर्म का प्रचार करो ॥२॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

राष्ट्र नायक का कर्त्तव्य

पदार्थान्वयभाषाः - पदार्थ - हे (नरा) = उत्तम नायक जनो, उत्तम स्त्री पुरुषो ! (युवं) = आप दोनों (सूनृतावते) = उत्तम सत्यवाणी से युक्त मनुष्य के हितार्थ (चित्रं) = आश्चर्यकारक और नाना (भोजनं) = पालन-सामर्थ्य और भोग-योग्य उत्तम ऐश्वर्य (ददथुः) = प्रदान करो और (अर्वाक् रथं चोदेथां) = अपने रमणीय व्यवहार को रथ के समान आगे प्रेरित करो, उसको (समनसा नियच्छतम्) = एक चित्त होकर नियम में रक्खो और (सोम्यं मधु) = 'सोम' अर्थात् ओषधिरस से मिले मधु के समान अति गुणकारी, रोगनाशक अन्न के समान पुष्टिकारक, सोम अर्थात् राजपद के योग्य, ऐश्वर्यानुरूप मधुर भोग, मधुर सुख का (पिबतम्) = उपभोग करो।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- उत्तम राष्ट्र नायक का कर्त्तव्य है कि वह राष्ट्र की प्रजाओं को पालन-पोषण हेतु उपभोग की सामग्री उपलब्ध करावे। मधुरतापूर्ण व्यवहार करे तथा सबको राजनियमों में चलावे।

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (युवम्) हे विद्वांसः ! यूयं (चित्रम् भोजनम्) विविधानि भोजनानि (ददथुः) भक्षयत। (नरा) सर्वाः प्रजाः (सूनृतावते) सुन्दरस्तोत्रेषु युष्मान् (चोदेथाम्) प्रेरयन्तु, यतो भवन्तः (अर्वाक्) तेषां समक्षं (रथम्) सुवेदगिरः (समनसा) स्वभावेन (नियच्छतम्) प्रयुञ्जानाः (सोम्यम्) सुन्दरं (मधु) रसं (पिबतम्) पिबन्तु ॥२॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O leading lights of humanity, you provide wonderful food for the body, mind and soul, provide inspiration and incentive for the man of truth and rectitude. With an equal mind with us all, bring up your chariot, add to the joy of the community and share the honey sweets of peace and pleasure.