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इ॒हेह॑ वः स्वतवसः॒ कव॑यः॒ सूर्य॑त्वचः। य॒ज्ञं म॑रुत॒ आ वृ॑णे ॥११॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

iheha vaḥ svatavasaḥ kavayaḥ sūryatvacaḥ | yajñam maruta ā vṛṇe ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

इ॒हऽइ॑ह। वः॒। स्व॒ऽत॒व॒सः॒। कव॑यः। सूर्य॑ऽत्वचः। य॒ज्ञम्। म॒रु॒तः॒। आ। वृ॒णे॒ ॥११॥

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ऋग्वेद » मण्डल:7» सूक्त:59» मन्त्र:11 | अष्टक:5» अध्याय:4» वर्ग:30» मन्त्र:5 | मण्डल:7» अनुवाक:4» मन्त्र:11


स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर विद्वान् क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - (सूर्यत्वचः) सूर्य्य के समान प्रकाशमान त्वचा जिन की ऐसे (स्वतवसः) अपने बलवाले हे (कवयः) विद्वान् (मरुतः) मनुष्यो ! (इहेह) इसी संसार में (वः) आप लोगों के (यज्ञम्) सङ्गतिस्वरूप यज्ञ को मैं (आ, वृणे) स्वीकार करता हूँ ॥११॥
भावार्थभाषाः - हे विद्वानो ! आप लोग विद्या आदि के प्रचार नामक कर्म्म की सदा उन्नति करिये ॥११॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

क्रान्तदर्शी जनों की नियुक्ति

पदार्थान्वयभाषाः - पदार्थ - हे (स्वतवसः) = स्वयं शरीर, आत्मा से बलशाली पुरुषो! हे (कवयः) = क्रान्तदर्शी जनो! हे (सूर्य-त्वचः) = सूर्य तुल्य देह - कान्तिवाले पुरुषो! हे (मरुतः) = विद्वानो! मैं (नः) = आप को (इह-इह) = इस-इस पद के निमित्त (आवृणे) = वरण करता हूँ। आप लोग (यज्ञं) = यज्ञ को (आ गत) = प्राप्त हों और (मा अप भूतन) = हमसे दूर न होवें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- राजा को योग्य है कि वह स्वस्थ व बलिष्ठ शरीरवाले तेजस्वी पुरुषों की नियुक्ति सेना में, क्रान्तदर्शी विद्वानों की नियुक्ति प्रशासनिक पदों तथा विज्ञान वेत्ताओं की नियुक्ति यज्ञ-शोध कार्यों में विभिन्न पदों पर करके राष्ट्र को सुदृढ़ एवं समृद्ध बनावे ।

स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनर्विद्वांसः किं कुर्युरित्याह ॥

अन्वय:

हे सूर्यत्वचस्स्वतवसः कवयो मरुत ! इहेह वो यज्ञमहमा वृणे ॥११॥

पदार्थान्वयभाषाः - (इहेह) अस्मिन् संसारे (वः) युष्माकम् (स्वतवसः) स्वकीयबलाः (कवयः) विद्वांसः (सूर्यत्वचः) सूर्य इव प्रकाशमाना त्वग्येषां ते (यज्ञम्) सङ्गतिमयम् (मरुतः) मनुष्याः (आ) समन्तात् (वृणे) स्वीकरोमि ॥११॥
भावार्थभाषाः - हे विद्वांसो ! भवन्तो विद्यादिप्रचाराख्यं कर्म सदोन्नयत ॥११॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Maruts, commanders of innate strength and power, creative visionaries of the highest order, illustrious as the refulgent sun, come here right now, I invoke you and choose you as the high priests of my yajna in the programme of social cohesion, creative production and universal benediction.

माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - हे विद्वानांनो ! तुम्ही विद्या वगैरेचा प्रचार करून उन्नती करा. ॥ ११ ॥