आ वां॑ सु॒म्ने वरि॑मन्त्सू॒रिभिः॑ ष्याम् ॥११॥
ā vāṁ sumne variman sūribhiḥ ṣyām ||
आ। वा॒म्। सु॒म्ने। वरि॑मन्। सू॒रिऽभिः॑। स्या॒म् ॥११॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर उसी विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
वरिमन् सुम्ने
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनस्तमेव विषयमाह ॥
हे राजसेनेशौ ! यथाऽहं सूरिभिः सह वरिमन् सुम्न आ स्यां तथा वां विदध्यातम् ॥११॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
The same subject is continued.
O King and Commander-in-Chief of ! the army may I along with other scholars and devotees of God, be a sharer in your very good happiness.
