स्तो॒त्रमिन्द्रो॑ म॒रुद्ग॑ण॒स्त्वष्टृ॑मान्मि॒त्रो अ॑र्य॒मा। इ॒मा ह॒व्या जु॑षन्त नः ॥११॥
stotram indro marudgaṇas tvaṣṭṛmān mitro aryamā | imā havyā juṣanta naḥ ||
स्तो॒त्रम्। इन्द्रः॑। म॒रुत्ऽग॑णः। त्वष्टृ॑ऽमान्। मि॒त्रः। अ॒र्य॒मा। इ॒मा। ह॒व्या। जु॒ष॒न्त॒। नः॒ ॥११॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर मनुष्य किसके साथ क्या करें, इस विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'स्तवन' तथा 'हव्य पदार्थों का ही सेवन'
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनर्मनुष्याः केन सह किं कुर्य्युरित्याह ॥
हे मनुष्या ! भवन्तो यो मरुद्गणस्त्वष्टृमान् मित्रोऽर्यमेन्द्रो भवेत्तेन सह न स्तोत्रमिमा हव्या च जुषन्त ॥११॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
What should men do with whom is told.
O men ! along with an opulent king who has a band of good and brave men as well as good artists and artisans, who is just and friend of all, accept with love the praise and food etc. offered by us.
