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अग्ने॑ यु॒क्ष्वा हि ये तवाश्वा॑सो देव सा॒धवः॑। अरं॒ वह॑न्ति म॒न्यवे॑ ॥४३॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

agne yukṣvā hi ye tavāśvāso deva sādhavaḥ | araṁ vahanti manyave ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अग्ने॑। यु॒क्ष्व। हि। ये। तव॑। अश्वा॑सः। दे॒व॒। सा॒धवः॑। अर॑म्। वह॑न्ति। म॒न्यवे॑ ॥४३॥

ऋग्वेद » मण्डल:6» सूक्त:16» मन्त्र:43 | अष्टक:4» अध्याय:5» वर्ग:29» मन्त्र:3 | मण्डल:6» अनुवाक:2» मन्त्र:43


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स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर उसी को कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे (देव) श्रेष्ठ सुख के देने और (अग्ने) शिल्प क्रिया की कुशलता को जाननेवाले विद्वन् ! (ये) जो (साधवः) श्रेष्ठ गमनवाले (तव) आपके (अश्वासः) वेग आदि गुण (मन्यवे) क्रोध के लिये (अरम्) समर्थ को (वहन्ति) प्राप्त होते हैं उनको (हि) ही आप वाहनों में (युक्ष्वा) संयुक्त करिये ॥४३॥
भावार्थभाषाः - जो विद्वान् जन अग्नि आदि का योजन वाहनों में करते हैं, वे पूर्ण मनोरथवाले होते हैं ॥४३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'साधवः अश्वासः '

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (अग्ने) = हे परमात्मन् ! (देव) = प्रकाशमय प्रभो ! (ये) = जो (तव) = आपके (हि) = निश्चय से (साधवः) = जीवनयात्रा में सब कार्यों को सिद्ध करनेवाले (अश्वास:) = इन्द्रियाश्व हैं, उन्हें युक्ष्व हमारे इस शरीररथ में जोतिये । [२] आपके अनुग्रह से हमारा शरीर-रथ उन इन्द्रियाश्वों से युक्त हो जो हमें (मन्यवे) = ज्ञान प्राप्ति के लिये (अरम्) = खूब ही वहन्ति ले चलते हैं। हमारी इन्द्रियाँ अपनेअपने विषयों का ग्रहण करती हुई ज्ञानवृद्धि का साधन बनें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हे प्रभो ! हमें उन इन्द्रियाश्वों को प्राप्त कराइये जो हमारी ज्ञानवृद्धि का कारण बनें।
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स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

अन्वय:

हे देवाग्ने ! ये साधवस्तवाश्वासो मन्यवेऽरं वहन्ति तान् हि त्वं यानेषु युक्ष्वा ॥४३॥

पदार्थान्वयभाषाः - (अग्ने) शिल्पविद्याविद्विद्वन् (युक्ष्वा) संयोजय। अत्र द्व्यचोऽतस्तिङ इति दीर्घः। (हि) (ये) (तव) (अश्वासः) वेगादयो गुणाः (देव) दिव्यसुखप्रद (साधवः) साधुगतयः (अरम्) अलम् (वहन्ति) प्राप्नुवन्ति (मन्यवे) क्रोधाय ॥४३॥
भावार्थभाषाः - ये विद्वांसोऽग्न्यादियोजनं यानेषु कुर्वन्ति ते पूर्णकामा भवन्ति ॥४३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Agni, leading light of knowledge and power, generous creator and giver, yoke those motive powers of yours to the chariot which are best and fastest and which transport you to the destination of your love and passion gracefully without fail.
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आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

The same subject is continued.

अन्वय:

O great technologist ! giver of the divine happiness, harness speed and other qualities which are of good movement and which can accomplish many works in the vehicles when used by a man of righteous indignation or worth.

भावार्थभाषाः - Those scientists who apply Agni (fire and electricity) and other things in the vehicles are able to fulfil their desires.
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माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - जे विद्वान लोक अग्नी इत्यादींना वाहनात वापरतात त्यांचे मनोरथ पूर्ण होतात. ॥ ४३ ॥