अ॒यं सोम॑श्च॒मू सु॒तोऽम॑त्रे॒ परि॑ षिच्यते। प्रि॒य इन्द्रा॑य वा॒यवे॑ ॥४॥
ayaṁ somaś camū suto matre pari ṣicyate | priya indrāya vāyave ||
अ॒यम्। सोमः॑। च॒मू इति॑। सु॒तः। अम॑त्रे। परि॑। सि॒च्य॒ते॒। प्रि॒यः। इन्द्रा॑य। वा॒यवे॑ ॥४॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
इन्द्राय वायवे प्रियः
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनर्मनुष्यै किं कर्त्तव्यमित्याह ॥
हे मनुष्या ! योऽयं वायव इन्द्राय सुतः प्रियः सोमोऽमत्रे परि षिच्यते स चमू परि वर्धयति ॥४॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
What should men do is told further.
This Soma juice of invigorating herbs and acquisition of great wealth which is desirable has been put in proper vessel for a mighty and a wealthy person. It increases the strength of the armies.
