स्व॒स्ति पन्था॒मनु॑ चरेम सूर्याचन्द्र॒मसा॑विव। पुन॒र्दद॒ताघ्न॑ता जान॒ता सं ग॑मेमहि ॥१५॥
svasti panthām anu carema sūryācandramasāv iva | punar dadatāghnatā jānatā saṁ gamemahi ||
स्व॒स्ति। पन्था॑म्। अनु॑। च॒रे॒म॒। सू॒र्या॒च॒न्द्र॒मसौ॑ऽइव। पुनः॑। दद॑ता। अघ्न॑ता। जा॒न॒ता। सम्। ग॒मे॒म॒हि॒ ॥१५॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
मनुष्यों को विद्वानों के सङ्ग से जो धर्ममार्ग उससे चलना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
नियमितता व सत्संग
स्वामी दयानन्द सरस्वती
मनुष्यैर्विद्वत्सङ्गेन धर्ममार्गेण गन्तव्यमित्याह ॥
वयं सूर्याचन्द्रमसाविव स्वस्ति पन्थामनु चरेम पुनर्ददताघ्नता जानता सह सङ्गमेमहि ॥१५॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
Men should walk on the path of Dharma (righteousness and duties) is told.
Let us follow the path of happiness like the sun and the moon. Let us keep company with men of charitable disposition, non-violent and enlightened persons.
