ते रा॒या ते सु॒वीर्यैः॑ सस॒वांसो॒ वि शृ॑ण्विरे। ये अ॒ग्ना द॑धि॒रे दुवः॑ ॥६॥
te rāyā te suvīryaiḥ sasavāṁso vi śṛṇvire | ye agnā dadhire duvaḥ ||
ते। रा॒या। ते। सु॒ऽवीर्यैः॑। स॒स॒ऽवांसः॑ वि। शृ॑ण्वि॒रे॒। ये। अ॒ग्ना। द॒धि॒रे। दुवः॑॥६॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
राया-सुवीर्यैः
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनस्तमेव विषयमाह ॥
ये विद्वांसोऽग्ना दुवो दधिरे गुणान् वि शृण्विरे ते राया सह ते सुवीर्यैस्सह ससवांस इवानन्दन्ति ॥६॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
The subject of Agni is highlighted.
The learned persons (scientists) utilize Agni (energy) and attentively listen to its properties. They enjoy happiness with abundant riches and good strength like the persons enjoy sound sleep after working hard in daytime.
