वांछित मन्त्र चुनें
432 बार पढ़ा गया

स॒द्यो जा॒तस्य॒ ददृ॑शान॒मोजो॒ यद॑स्य॒ वातो॑ अनु॒वाति॑ शो॒चिः। वृ॒णक्ति॑ ति॒ग्माम॑त॒सेषु॑ जि॒ह्वां स्थि॒रा चि॒दन्ना॑ दयते॒ वि जम्भैः॑ ॥१०॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

sadyo jātasya dadṛśānam ojo yad asya vāto anuvāti śociḥ | vṛṇakti tigmām ataseṣu jihvāṁ sthirā cid annā dayate vi jambhaiḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स॒द्यः। जा॒तस्य॑। ददृ॑शानम्। ओजः॑। यत्। अ॒स्य॒। वातः॑। अ॒नु॒ऽवाति॑। शो॒चिः। वृ॒णक्ति॑। ति॒ग्माम्। अ॒त॒सेषु॑। जि॒ह्वाम्। स्थि॒रा। चि॒त्। अन्ना॑। द॒य॒ते॒। वि। जम्भैः॑॥१०॥

432 बार पढ़ा गया
ऋग्वेद » मण्डल:4» सूक्त:7» मन्त्र:10 | अष्टक:3» अध्याय:5» वर्ग:7» मन्त्र:5 | मण्डल:4» अनुवाक:1» मन्त्र:10


स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे विद्वान् जनो ! (अस्य) इस (सद्यः) शीघ्र (जातस्य) उत्पन्न हुए विद्युत् रूप अग्निप्रताप के (यत्) जिस (ददृशानम्) देखने योग्य (ओजः) वेगयुक्त बल के (वातः) वायु (अनुवाति) पीछे चलता है, जो इस साधारण अग्नि को (शोचिः) प्रज्वलित लपट को (अतसेषु) वृक्ष आदिकों में (तिग्माम्) तीव्र गति को और (जिह्वाम्) वाणी को (वृणक्ति) सेवन करता है और जो (वि, जम्भैः) गमनों के आक्षेपों से (चित्) भी (स्थिरा) दृढ़ (अन्ना) भोजन करने योग्य पदार्थों को (दयते) देता है, उस बिजुली रूप अग्नि को जान के कार्यों में प्रयुक्त करो ॥१०॥
भावार्थभाषाः - जो शिल्पीजन पदार्थों से बिजुली को उत्पन्न करें तो वह बिजुली देखने योग्य पराक्रम और वेग को दिखा के अनेक प्रकार के ऐश्वर्य्यों को देती है ॥१०॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

सात्विक आहार

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (सद्यः जातस्य) = अभी अभी प्रादुर्भूत हुए हुए प्रभु का (ओजः) = ओज [तेज] (ददृशानम्) = दर्शनीय होता है। हृदय में प्रभु का आभास होते ही भक्त ओजस्विता का अनुभव करता है। (अस्य शोचिः अनु) = इसकी दीप्ति के अनुसार (यत्) = जब (वातः) = वाति प्राण गति करता है तो (अतसेषु) = [souls] आत्माओं में (तिग्मां जिह्वाम्) = शत्रुओं के लिये अत्यन्त तीक्ष्ण इस ज्ञानाग्नि की ज्वाला रूप जिह्वा को (वृणक्ति) = [gives] देता है। प्रभु अपने उपासक को वह ज्ञान-ज्वाला प्राप्त कराते हैं, जिसमें वह सब शत्रुओं का दहन कर पाता है। [२] उस समय यह उपासक (जम्भैः) = अपने दाँतों से (स्थिरा चित् अन्ना) = स्थिर ही अन्नों को, सात्विक अन्नों को 'रस्याः स्निग्धाः स्थिरा हृषा: आहारा: सात्विक प्रिया:' (विदयेत) = [accept] ग्रहण करता है। इस सात्विक अन्न के सेवन से उसकी सत्व शुद्धि होकर, उसका ज्ञान बढ़ता है। इस ज्ञानाग्नि में उनके सब शत्रुओं का दहन हो जाता है। 'काम-क्रोध-लोभ' के विनाश का यही मार्ग है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु का आभास होते ही तीव्र ज्ञान ज्योति प्राप्त होती है। इसमें उसके सब शत्रुओं का दहन हो जाता है। इसके लिये वह सात्विक ही अन्नों का सेवन करता है।

स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

अन्वय:

हे विद्वांसो ! अस्य सद्यो जातस्य यद्ददृशानमोजो वातोऽनुवाति यदस्य शोचिरतसेषु तिग्मां जिह्वां वृणक्ति यो विजम्भैश्चित्स्थिरा अन्ना दयते तं विद्युतमग्निं विज्ञाय संप्रयुङ्ध्वम् ॥१०॥

पदार्थान्वयभाषाः - (सद्यः) क्षिप्रम् (जातस्य) उत्पन्नस्य (ददृशानम्) द्रष्टव्यम् (ओजः) वेगवद्बलम् (यत्) (अस्य) (वातः) वायुः (अनुवाति) (शोचिः) प्रदीप्तम् (वृणक्ति) सम्भजति (तिग्माम्) तीव्रां गतिम् (अतसेषु) वृक्षादिषु (जिह्वाम्) वाचम् (स्थिरा) स्थिराणि (चित्) अपि (अन्ना) अत्तव्यानि (दयते) ददाति (वि) (जम्भैः) गत्याक्षेपैः ॥१०॥
भावार्थभाषाः - यदि शिल्पिनः पदार्थेभ्यो विद्युतं जनयेयुस्तर्हि सा दर्शनीयं पराक्रमं वेगं च दर्शयित्वा विविधान्यैश्वर्य्याणि ददाति ॥१०॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - The light and lustre of the flames of this Agni instantly risen becomes worth seeing when the wind fans its flames and spreads the blaze into the forests and uproots strong and firm trees and, with the flames as jaws it crushes and devours the strong as food. And when with the breeze and vital heat it fans the vegetation with its currents, it protects, matures and provides the foods for life.

आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

The subject of Agni still moves.

अन्वय:

O learned persons ! the strength of the speedily generated Agni is open to maked eyes. When the wind blows enormously it spreads its blazing flames amongst the trees. You should know the attributes of this Agni (energy) and also of the electricity. With its movements, it gives various kinds of good food. You should then utilize these forms of Agni for various purposes.

भावार्थभाषाः - If artists generate energy from various things articles, it shows great speed and strength and gives wealth and prosperity in various forms.

माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - जेव्हा जे कारागीर पदार्थांतून विद्युत उत्पन्न करतात तेव्हा ती विद्युत दर्शनीय असून पराक्रम व वेग दाखवून अनेक प्रकारचे ऐश्वर्य देते. ॥ १० ॥