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रथे॑न पृथु॒पाज॑सा दा॒श्वांस॒मुप॑ गच्छतम्। इन्द्र॑वायू इ॒हा ग॑तम् ॥५॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

rathena pṛthupājasā dāśvāṁsam upa gacchatam | indravāyū ihā gatam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

रथे॑न। पृ॒थु॒ऽपाज॑सा। दा॒श्वांस॑म्। उप॑। ग॒च्छ॒त॒म्। इन्द्र॑वायू॒ इति॑। इ॒ह। आ। ग॒त॒म् ॥५॥

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ऋग्वेद » मण्डल:4» सूक्त:46» मन्त्र:5 | अष्टक:3» अध्याय:7» वर्ग:22» मन्त्र:5 | मण्डल:4» अनुवाक:5» मन्त्र:5


स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे (इन्द्रवायू) वायु और बिजुलीरूप अग्नि के सदृश प्रतापी राजा और सेना के ईश जनो ! आप दोनों (पृथुपाजसा) विस्तीर्ण बलयुक्त (रथेन) रमणीय वाहन से (इह) इस संग्राम में (आ, गतम्) आओ और (दाश्वासंम्) दाता जन के (उप, गच्छतम्) समीप प्राप्त होओ ॥५॥
भावार्थभाषाः - जैसे वायु और बिजुली बड़े प्रताप से युक्त वर्त्तमान हैं, वैसे ही राजा और मन्त्रीजन होवें ॥५॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

जितेन्द्रियता व क्रियाशीलता

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्रवायू) = जितेन्द्रियता व क्रियाशीलतारूप दिव्यगुणो! आप (पृथुपाजसा) = प्रभूत बलवाले (रथेन) = इस शरीर रथ से (दाश्वांसम्) = आप के प्रति अपने को देनेवाले पुरुष को (उपगच्छतम्) = समीपता से प्राप्त होओ। इस दाश्वान् के शरीर-रथ को आप बड़ा शक्तिशाली बनाओ। [२] हे इन्द्रवायू ! आप इह इसी जीवनयज्ञ में (आगतम्) = हमें प्राप्त होओ। हम इस जीवन में जितेन्द्रिय व क्रियाशील बनें। ऐसा बनने से हमारा यह शरीररथ प्रभूत बलवाला हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- जितेन्द्रियता व क्रियाशीलता हमारे शरीर-रथ को अत्यन्त शक्तिशाली बनाते हैं ।

स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

अन्वय:

हे इन्द्रवायू इव प्रतापिनौ राजसेनेशौ ! युवां पृथुपाजसा रथेनेहाऽऽगतं दाश्वांसमुपगच्छतम् ॥५॥

पदार्थान्वयभाषाः - (रथेन) रमणीयेन यानेन (पृथुपाजसा) विस्तीर्णबलेन (दाश्वांसम्) दातारम् (उप) (गच्छतम्) (इन्द्रवायू) वायुविद्युदग्नी इव राजसेनेशौ (इह) अस्मिन् सङ्ग्रामे (आ) (गतम्) ॥५॥
भावार्थभाषाः - यथा वायुविद्युतौ महाप्रतापयुक्तौ वर्त्तेते तथैव राजाऽमात्यौ भवेताम् ॥५॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra and Vayu, come here by the chariot, big and spacious and powerful, and go to reach the man of charity.

आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

More about the energy is told.

अन्वय:

O king and Commander of army ! you are mighty like the wind and electricity. Come here to this battle-field with your very strong charming vehicle and go to a liberal donor.

भावार्थभाषाः - Like the wind and electricity, a king and his ministers should be strong.

माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - जसे वायू व विद्युत अत्यंत बलशाली असतात तसेच राजा व मंत्रीगण असावेत. ॥ ५ ॥