अग्रं॑ पिबा॒ मधू॑नां सु॒तं वा॑यो॒ दिवि॑ष्टिषु। त्वं हि पू॑र्व॒पा असि॑ ॥१॥
agram pibā madhūnāṁ sutaṁ vāyo diviṣṭiṣu | tvaṁ hi pūrvapā asi ||
अग्र॑म्। पि॒ब॒। मधू॑नाम्। सु॒तम्। वा॒यो॒। इति॑। दिवि॑ष्टिषु। त्वम्। हि। पू॒र्व॒ऽपाः। असि॑ ॥१॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अब सात ऋचावाले छियालीसवें सूक्त का आरम्भ हैं उसके प्रथम मन्त्र में बिजुली की विद्या के विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
क्रियाशीलता द्वारा सोमरक्षण
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अथ विद्युद्विद्याविषयमाह ॥
हे वायो ! हि त्वं दिविष्टिषु पूर्वपा असि तस्मान्मधूनामग्रं सुतं रसं पिबा ॥१॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
The science of electricity is told.
O learned person! you are the mightiest like the wind. You are verily the Protector of the ancient knowledge regarding the divine activities. Drink the first quality of (best) effused juice of the sweet saps.
माता सविता जोशी
(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)या सूक्तात विद्युत व वायूच्या गुणांचे वर्णन असल्यामुळे या सूक्ताच्या अर्थाबरोबर पूर्व सूक्ताच्या अर्थाची संगती जाणावी.
