वांछित मन्त्र चुनें
433 बार पढ़ा गया

असि॑क्न्यां॒ यज॑मानो॒ न होता॑ ॥१५॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

asiknyāṁ yajamāno na hotā ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

असि॑क्न्याम्। यज॑मानः। न। होता॑ ॥१५॥

433 बार पढ़ा गया
ऋग्वेद » मण्डल:4» सूक्त:17» मन्त्र:15 | अष्टक:3» अध्याय:5» वर्ग:23» मन्त्र:5 | मण्डल:4» अनुवाक:2» मन्त्र:15


स्वामी दयानन्द सरस्वती

अब राजदण्ड की प्रकर्षता को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - जो राजा (यजमानः) मेल करनेवाले के (न) सदृश (असिक्न्याम्) रात्रि में भयरहित (होता) सुख को देनेवाला होवे, वही निरन्तर आनन्द करे ॥१५॥
भावार्थभाषाः - जिस राजा के प्रजाजनों में प्राणियों वा शयन किये हुओं में दण्ड जागता है, वह अभय का देनेवाला पुरुष किसी से भी भय को नहीं प्राप्त होता है ॥१५॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

दिन-रात चलनेवाला यज्ञ

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (असिक्न्याम्) = रात्रि में भी (यजमानः न) = यज्ञशील की तरह (होता) = वे प्रभु आहुति देनेवाले हैं। उस प्रभु का यह सृष्टियज्ञ दिन-रात चलता है। 'दिन में प्रभु कार्य करते हों और रात्रि में सो जाते हों' ऐसी बात नहीं है। प्रभु का यह सृष्टियज्ञ दिन-रात चलता है। दिन में प्रभु सूर्य द्वारा ब्रह्माण्ड को प्रकाश प्राप्त कराते हैं, तो रात्रि में चन्द्रमा की ज्योत्स्ना को करनेवाले हैं। [२] प्रभु का यह सृष्टियज्ञ दिन-रात चलता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु इस सृष्टियज्ञ के महान् होता हैं।

स्वामी दयानन्द सरस्वती

अथ राजदण्डप्रकर्षतामाह ॥

अन्वय:

यो राजा यजमानो नाऽसिक्न्यामभयस्य होता स्यात् स एव सततं मोदेत ॥१५॥

पदार्थान्वयभाषाः - (असिक्न्याम्) रात्रौ। असिक्नीति रात्रिनामसु पठितम्। (निघं०१.७) (यजमानः) सङ्गन्ता (न) इव (होता) सुखस्य दाता ॥१५॥
भावार्थभाषाः - यस्य राज्ञः प्रजाजनेषु प्राणिषु सुप्तेषु दण्डो जागर्त्ति सोऽभयदः कुतश्चिदपि भयं नाऽऽप्नोति ॥१५॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - In the great dark night of the universe, Indra is the yajamana of creation, the clarion call as well as the performer, preserving the fire eternal.

आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

The significance of firm dealing in administration under law by a king is told.

अन्वय:

That king always enjoys happiness who like a Yajamana (performer of Yajna) is giver of fearlessness at night time.

भावार्थभाषाः - The king instils fearlessness among the people with strict enforcement of law. The people then do not get fear from any quarter.

माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - ज्या राजाच्या प्रजेमध्ये, प्राण्यामध्ये, शयन केलेल्यामध्ये दंड (राजा) जागृत असतो तो अभय देणारा पुरुष कुणालाही घाबरत नाही. ॥ १५ ॥