वांछित मन्त्र चुनें
471 बार पढ़ा गया

बलं॑ धेहि त॒नूषु॑ नो॒ बल॑मिन्द्रान॒ळुत्सु॑ नः। बलं॑ तो॒काय॒ तन॑याय जी॒वसे॒ त्वं हि ब॑ल॒दा असि॑॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

balaṁ dhehi tanūṣu no balam indrānaḻutsu naḥ | balaṁ tokāya tanayāya jīvase tvaṁ hi baladā asi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

बल॑म्। धे॒हि॒। त॒नूषु॑। नः॒। बल॑म्। इ॒न्द्र॒। अ॒न॒ळुत्ऽसु॑। नः॒। बल॑म्। तो॒काय॑। तन॑याय। जी॒वसे। त्वम्। हि। ब॒ल॒ऽदाः। असि॑॥

471 बार पढ़ा गया
ऋग्वेद » मण्डल:3» सूक्त:53» मन्त्र:18 | अष्टक:3» अध्याय:3» वर्ग:22» मन्त्र:3 | मण्डल:3» अनुवाक:4» मन्त्र:18


स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - हे (इन्द्र) अत्यन्त ऐश्वर्य्य के देनेवाले ! (हि) जिससे आप (बलदाः) बल के देनेवाले (असि) हैं इससे (नः) हम लोगों के (तनूषु) शरीरों में (बलम्) बल को (धेहि) धारण करो और (नः) हम लोगों को (अनळुत्सु) गौ आदिकों में (बलम्) बल को धारण करो, हम लोगों के (जीवसे) जीवन और (तोकाय) छोटे बालक तथा (तनयाय) कौमार अवस्था को प्राप्त पुरुष के लिये (बलम्) पराक्रम को धारण करो ॥१८॥
भावार्थभाषाः - हे आचार्य्य ! आप जिससे कि शरीर और आत्मा के बल से युक्त हो, इससे हम लोगों में पूर्ण शरीर और आत्मा के बल को धारण करो ॥१८॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'बलदा' प्रभु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो ! (न:) = हमारे (तनूषु) = शरीरों में (बलं धेहि) = बल को धारण करिए। (इन्द्र) = सर्वशक्तिमन् ! (न:) = हमारे (अनुडुत्सु) = इन्द्रियरूप बैलों में (बलम्) = बल को धारण करिए । [२] (तोकाय तनयाय) = हमारे पुत्रों व पौत्रों में (बलम्) = बल को धारण करिए, (जीवसे) = ताकि उनका जीवन उत्तम बने । (त्वं हि) = आप ही (बलदा:) = बल को देनेवाले (असि) = हैं ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हे प्रभो! हमें बल दीजिए, ताकि हम उत्तम जीवन को बिता सकें।

स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनस्तमेव विषयमाह।

अन्वय:

हे इन्द्र ! हि यतस्त्वं बलदा असि तस्मान्नस्तनूषु बलं धेहि। नोऽनळुत्सु बलं धेहि नो जीवसे तोकाय तनयाय बलं धेहि ॥१८॥

पदार्थान्वयभाषाः - (बलम्) पराक्रमम् (धेहि) (तनूषु) शरीरेषु (नः) अस्मान् (बलम्) (इन्द्र) परमैश्वर्यप्रद (अनळुत्सु) गवादिषु (नः) अस्माकम् (बलम्) (तोकाय) ह्रस्वाय बालकाय (तनयाय) प्राप्तकौमारयौवनाऽवस्थाय (जीवसे) जीवितुम् (त्वम्) (हि) यतः (बलदाः) (असि) ॥१८॥
भावार्थभाषाः - हे आचार्य ! भवान् यस्माच्छरीरात्मबलवानस्ति तस्मादस्मासु पूर्णं शरीरात्मबलं निधेहि ॥१८॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, Spirit of life and vitality, give strength to our bodies, put strength into our animals. Give strength and vital energy to our children and our youth. You alone are the giver of strength, energy and vitality.

आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

The tasks set before the enlightened persons are stated.

अन्वय:

O Indra (Acharya, giver of the. great wealth of health and wisdom)! give strength to our bodies;; give strength to the bulls who carry our vehicles; give strength to our infants and grown up sons, so that they may live long. Indeed, you are the giver of strength.

भावार्थभाषाः - O Acharya (Preceptor) as you are endowed with physical and spiritual power, enable us also to have full power of the body and soul.

माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - हे आचार्य! तुम्ही शरीर व आत्म्याच्या बलाने युक्त आहात. त्यामुळे आमच्यामध्ये पूर्ण शरीर व आत्मबल धारण करा. ॥ १८ ॥