अस्ती॒दम॑धि॒मन्थ॑न॒मस्ति॑ प्र॒जन॑नं कृ॒तम्। ए॒तां वि॒श्पत्नी॒मा भ॑रा॒ग्निं म॑न्थाम पू॒र्वथा॑॥
astīdam adhimanthanam asti prajananaṁ kṛtam | etāṁ viśpatnīm ā bharāgnim manthāma pūrvathā ||
अस्ति॑। इ॒दम्। अ॒धि॒ऽमन्थ॑नम्। अस्ति॑। प्र॒ऽजन॑नम्। कृ॒तम्। ए॒ताम्। वि॒श्पत्नी॑म्। आ। भ॒र॒। अ॒ग्निम्। म॒न्था॒म॒। पू॒र्वऽथा॑॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अब तृतीय मण्डल में सोलह ऋचावाले उनतीसवें सूक्त का प्रारम्भ है। उसके प्रथम मन्त्र से विद्युत् अग्नि और वायु से विद्वान् लोग किस-किस कर्म को सिद्ध करते हैं, इस विषय को कहा है।
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
[१] जैसे दूध का जमा रूप दही 'मक्खन' की उत्पत्ति का आधार होती है तथा मथानी [मन्थनदण्ड] उस मक्खन की प्राप्ति का साधन बनती है, इसी प्रकार (इदं अधिमन्थनं अस्ति) = यह बुद्धि [= अन्तःकरण] तो उत्कृष्ट मन्थनदण्ड है तथा सृष्टि के प्रारम्भ में दिये जानेवाला यह गत सूक्त का पुरोडाश [= वेदज्ञान] (प्रजननं कृतं अस्ति) = प्रजनन किया गया है। यह वेदज्ञान ही परमात्म-प्रकाश का आधार बनता है 'सर्वे वेदा यत्पदमामनन्ति' । [२] बुद्धिरूप मन्थनदण्ड द्वारा इस वेदज्ञान रूप दधि का मन्थन करने से ज्ञानप्रकाश की उत्पत्ति होती है। (एताम्) = इस (विश्पत्नीम्) = प्रजाओं की पालिका वेदविद्या को आभर तू अपने में भरनेवाला बन। इस वेदज्ञान से हम पूर्वथा पहले की तरह (अग्निम्) = उस अग्नि नामक प्रभु को (मन्थाम) = मथित करें। इस वेदज्ञान रूप दधि के मन्थन से प्रभु प्रकाश रूप 'नवनीत' को हम प्राप्त करते हैं ।
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अथ विद्युदग्निवायुभ्यां विद्वांसः किं किं साधयन्तीत्याह।
हे विद्वन् ! यदीदमधिमन्थनमस्ति यच्च प्रजननं कृतमस्ति ताभ्यामेतां विश्पत्नीं वयं पूर्वथाऽग्निं मन्थामेवाऽऽभर ॥१॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
What do the enlightened persons accomplish with energy/electricity is told.
O learned person ! here the upper part of the (apparatus of attrition) fire sticks are ready to generate the electric fire. Maintain this energy which protects the people. Let us generate this electricity by rubbing as is done by the wise persons since the ancient times.
माता सविता जोशी
(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)या सूक्तात अग्नी, वायू व विद्वानांच्या गुणांचे वर्णन असल्यामुळे या सूक्तात सांगितलेल्या अर्थाची पूर्व सूक्तार्थाबरोबर संगती जाणावी.
