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सोमो॑ वधू॒युर॑भवद॒श्विना॑स्तामु॒भा व॒रा । सू॒र्यां यत्पत्ये॒ शंस॑न्तीं॒ मन॑सा सवि॒ताद॑दात् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

somo vadhūyur abhavad aśvināstām ubhā varā | sūryāṁ yat patye śaṁsantīm manasā savitādadāt ||

पद पाठ

सोमः॑ । व॒धू॒ऽयुः । अ॒भ॒व॒त् । अ॒श्विना॑ । आ॒स्ता॒म् । उ॒भा । व॒रा । सू॒र्याम् । यत् । पत्ये॑ । शंस॑न्तीम् । मन॑सा । स॒वि॒ता । अद॑दात् ॥ १०.८५.९

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:85» मन्त्र:9 | अष्टक:8» अध्याय:3» वर्ग:21» मन्त्र:4 | मण्डल:10» अनुवाक:7» मन्त्र:9


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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (मनसा शंसन्तीं सूर्याम्) मन से पति को चाहती हुई ब्रह्मचर्य और यौवन से सम्पन्न तेजस्वी कन्या को (सविता यत् पत्ये-अददात्) कन्या को उत्पन्न करनेवाला पिता जब पति के लिये-वर के लिये देता है, तब (सोमः-वधूयुः-अभवत्) सोम्यगुणसम्पन्न वीर्यवान् ब्रह्मचारी वधू को प्राप्त करने की इच्छावाला प्राप्त हो जाता है (अश्विना-वरा-आस्ताम्) वे दोनों परस्पर प्राण-अपान के समान एक दूसरे को वरण करनेवाले साथी हो जाते हैं ॥९॥
भावार्थभाषाः - जब कन्या ब्रह्मचर्य और यौवन से पूर्ण हो जाए, पति की इच्छा रखती हुई हो, तो उसका पिता सोम्यगुण ब्रह्मचर्य से सम्पन्न युवा वधू की इच्छा रखते हुए के साथ्विवाह कर दे और पुनः वे दोनों अविरोधी भाव से मिलकर रहें ॥९॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'सूर्या' का 'सोम' के साथ विवाह

पदार्थान्वयभाषाः - [१] पत्नी को 'सूर्या' बनना चाहिए तो पति को 'सोम' बनने का प्रयत्न करना चाहिए । पति सोम का रक्षण करता हुआ सोमशक्ति का पुत्र हो, इस सोमशक्ति के रक्षण से वह सौम्य स्वभाव का भी हो। यह (सोमः) = सोमशक्ति का रक्षक सौम्य स्वभाव का युवक (वधूयुः अभवत्) = वधू की कामनावाला हुआ। जब यह वधू की कामनावाला हुआ तो (उभा अश्विना) = दोनों माता-पिता (वरा) = उसके साथी का चुनाव करनेवाले (आस्ताम्) = हुए। [२] सूर्या के माता-पिता युवक की तलाश में थे, सोम के माता-पिता भी योग्य युवति की खोज कर रहे थे। अग्नि ज्ञानी आचार्य ने उनका पथप्रदर्शन किया। उसके सुझाव पर (यत्) = जब (सूर्या यत्ये शंसन्तीम्) = पति का शंसन [इच्छा] करनेवाली हुई तब (सूर्याम्) = उस सूर्या को (सविता) = सूर्यतुल्य इसके पिता ने इसे (मनसा) = पूरे दिल से सोम के लिये अददात् दे दिया। इस प्रकार सूर्या का सोम के साथ विवाह सम्पन्न हो गया।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- 'युवक पत्नी की कामनावाला हो, युवति पति की कामनावाली' तो उनके माता पिता को उनके विवाह सम्बन्ध का आयोजन कर देना चाहिए ।
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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (मनसा शंसन्तीं सूर्याम्) मनसा कामयमानां ब्रह्मचर्ययौवनाभ्यां तेजस्विनीं कन्याम् (सविता यत् पत्ये-अददात्) कन्याया उत्पादयिता पिता यदा पत्ये वराय ददाति, तदा (सोमः-वधूयुः-अभवत्) सोम्यगुणसम्पन्नो वीर्यवान् ब्रह्मचारी वधूं प्राप्तुकामो भवति प्राप्नुयात् (अश्विना-वरा-आस्ताम्) तौ प्राणापानाविव परस्परं वरयितारौ रक्षणकर्तारौ भवतः ॥९॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Soma is the proposer and Ashvins, pranic energies, the first attraction and attention, when Savita, giver of life and light, gives away the bride, love-lorn at heart, to the groom.