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वनी॑वानो॒ मम॑ दू॒तास॒ इन्द्रं॒ स्तोमा॑श्चरन्ति सुम॒तीरि॑या॒नाः । हृ॒दि॒स्पृशो॒ मन॑सा व॒च्यमा॑ना अ॒स्मभ्यं॑ चि॒त्रं वृष॑णं र॒यिं दा॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

vanīvāno mama dūtāsa indraṁ stomāś caranti sumatīr iyānāḥ | hṛdispṛśo manasā vacyamānā asmabhyaṁ citraṁ vṛṣaṇaṁ rayiṁ dāḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

वनी॑वानः । मम॑ । दू॒तासः॑ । इन्द्र॑म् । सोमाः॑ । च॒र॒न्ति॒ । सु॒ऽम॒तीः । इ॒या॒नाः । हृ॒दि॒ऽस्पृशः॑ । मन॑सा । व॒च्यमा॑नाः । अ॒स्मभ्य॑म् । चि॒त्रम् । वृष॑णम् । र॒यिम् । दाः॒ ॥ १०.४७.७

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ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:47» मन्त्र:7 | अष्टक:8» अध्याय:1» वर्ग:4» मन्त्र:2 | मण्डल:10» अनुवाक:4» मन्त्र:7


ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (मम) मुझ स्तोता के (स्तोमाः) पूर्वोक्त स्तुतिसमूह (वनीवानाः) अनुरागवाले (दूतासः) दूत की भाँति अभिप्राय प्रकट करनेवाले (सुमतीः-इयानाः) प्रियकारिणी मतियों को चाहते हुए (हृदिस्पृशः-मनसा वच्यमानाः) हृदय में लगती हुई-अन्तःकरण से उच्चरित होती हुई सी (इन्द्रं चरन्ति) परमात्मा को प्राप्त होती हैं (अस्मभ्यम्…) पूर्ववत्॥७॥
भावार्थभाषाः - उपासक की स्तुतियाँ अनुरागपूर्ण कल्याण चाहती हुई, हृदय में लगती हुई, अन्तःकरण से निकली हुई परमात्मा के लिए होनी चाहिए। वह परमात्मा हमारे लिए धनों और सुखों को प्राप्त कराता है ॥७॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

स्तवन का सन्तान पर प्रभाव

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (मम स्तोमाः) = मेरे स्तवन (इन्द्रं चरन्ति) = प्रभु को प्राप्त होते हैं । वे स्तवन जो कि [क] (वनीवानः) = सम्भजनवाले हैं, प्रभु का उपासन करनेवाले हैं, [ख] (दूतासः) = प्रभु के गुणों का उच्चारण करनेवाले हैं अथवा प्रभु के सन्देश को मेरे तक पहुँचानेवाले हैं तथा [ग] (सुमती:) = कल्याणी मतियों को (इयानाः) = प्राप्त करानेवाले हैं । [घ] (हृदिस्पृशः) = हृदय स्पर्शी हैं, हृदय को प्रभावित करनेवाले हैं। [ङ] (मनसा वच्यमाना:) = मन से बोलने जा रहे हैं। ये स्तोत्र 'यान्त्रिक रूप में वाणी से उच्चारित होते जाते हों' ऐसी बात नहीं, अर्थ चिन्तन के साथ ये मन से बोले जा रहे हैं। ऐसा होने पर ही ये हृदय को प्रभावित करते हैं । [२] ऐसे स्तवनों के होने पर ही उत्तम सन्तान प्राप्त होती है और तभी हम इस प्रार्थना के अधिकारी होते हैं कि (अस्मभ्यम्) = हमारे लिये (रयिं दाः) = उस पुत्राख्य धन को दीजिये जो कि (चित्रम्) = ज्ञानी बनकर ज्ञान का देनेवाला हो और (वृषणम्) = शक्तिशाली हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - जिस घर में प्रभु का स्तवन चलता है, वहाँ अवश्य सन्तान उत्तम होती है ।

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (मम) मम स्तोतुः (स्तोमाः) पूर्वोक्ताः स्तुतिसमूहाः (वनीवानाः) सम्भजनवन्तः-अनुरागवन्तः (दूतासः) दूतवदभिप्रायं प्रकटयन्तः (सुमतीः-इयानाः) अनुकूलमतीः प्रियकारिणीर्मतीर्याचमानाः (हृदिस्पृशः-मनसा वच्यमानाः) हृदये संलग्ना मनसाऽन्तः- करणेनोच्यमानाः (इन्द्रं चरन्ति) परमात्मानं प्राप्नुवन्ति (अस्मभ्यम्…) पूर्ववत् ॥७॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - My songs of adoration full of love and faith, vibrating with holy thoughts, expressive of the language of my mind and touching the heart, reach Indra like messengers of my soul. Indra, pray give us wondrous wealth of the world in abundance.