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स॒वि॒ता प॒श्चाता॑त्सवि॒ता पु॒रस्ता॑त्सवि॒तोत्त॒रात्ता॑त्सवि॒ताध॒रात्ता॑त् । स॒वि॒ता न॑: सुवतु स॒र्वता॑तिं सवि॒ता नो॑ रासतां दी॒र्घमायु॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

savitā paścātāt savitā purastāt savitottarāttāt savitādharāttāt | savitā naḥ suvatu sarvatātiṁ savitā no rāsatāṁ dīrgham āyuḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स॒वि॒ता । प॒श्चाता॑त् । स॒वि॒ता । पु॒रस्ता॑त् । स॒वि॒ता । उ॒त्त॒रात्ता॑त् । स॒वि॒ता । अ॒ध॒रात्ता॑त् । स॒वि॒ता । नः॒ । सु॒व॒तु॒ । स॒र्वऽता॑तिम् । स॒वि॒ता । नः॒ । रा॒स॒ता॒म् । दी॒र्घम् । आयुः॑ ॥ १०.३६.१४

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ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:36» मन्त्र:14 | अष्टक:7» अध्याय:8» वर्ग:11» मन्त्र:4 | मण्डल:10» अनुवाक:3» मन्त्र:14


ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सविता पश्चातात्) सर्वोत्पादक प्रेरक परमात्मा हमारा पश्चिम से रक्षा करनेवाला (सविता पुरस्तात्) सर्वोत्पादक परमात्मा हमारा पूर्व से रक्षा करनेवाला (सविता-उत्तरात्तात्) सर्वोत्पादक प्रेरक परमात्मा हमारा उत्तर से रक्षा करनेवाला (सविता-अधरात्तात्) सर्वोत्पादक हमारी अधो दिशा से-नीचे की दिशा से हमारी रक्षा करनेवाला (सविता नः सर्वतातिं सुवतु) सर्वोत्पादक प्रेरक परमात्मा हमारी समस्त कल्याणकारी वस्तु को उत्पन्न करे-प्रेरित करे-देवे (सविता नः-दीर्घम्-आयुः-रासताम्) सर्वोत्पादक प्रेरक परमात्मा हमारे लिये दीर्घ जीवन देवे ॥१४॥
भावार्थभाषाः - उत्पादक प्रेरक परमात्मा के आदेश के अनुसार रहने पर वह सर्व दिशाओं से रक्षा करता है और कल्याणकारी वस्तु एवं जीवन प्रदान करता है ॥१४॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

सविता से सुत सर्वताति

पदार्थान्वयभाषाः - [१] गत मन्त्र में प्रार्थना की गई है कि हम सत्य प्रेरणा देनेवाले सविता को प्रेरणा में चलते हुए देव बनें और सौभाग्यशाली जीवनवाले हों। उसी प्रार्थना को परिवर्तित रूप में इस प्रकार करते हैं कि वह सर्वव्यापक, सर्वप्रेरक (सविता) = सम्पूर्ण ऐश्वर्यौवाला प्रभु (पश्चातात्) = पीछे से वही (सविता) = प्रेरक प्रभु (पुरस्तात्) = सामने से वही (सविता) = सब उत्तमताओं को जन्म देनेवाला प्रभु (उत्तरात्तात्) = ऊपर उत्तर से तथा वही सविता जन्मदाता प्रभु (अधरात्तात्) = नीचे से यह (सविता) = उत्पादक प्रभु (नः) = हमारे लिये (सर्वतातिम्) = सब शक्तियों के विस्तार को (सुवतु) = प्रेरित करे । सविता की कृपा से हमारे जीवनों में सब शक्तियों का विस्तार हो । [२] इस शक्ति के विस्तार के द्वारा (सविता) = यह प्रेरक प्रभु (नः) = हमें (दीर्घम् आयुः) = दीर्घ जीवन (रासताम्) = दें शक्तियों के ह्रास से जीवन का ह्रास है, शक्तियों के विस्तार से जीवन का विस्तार है। शक्तियों का विस्तार करते हुए प्रभु हमें दीर्घजीवन प्राप्त कराते हैं ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सविता की कृपा से हमारी सब शक्तियों का विस्तार हो और हमें दीर्घजीवन प्राप्त हो । सूक्त के प्रारम्भ में कहा गया है कि सब देवों का अनुकरण करते हुए मैं अपने जीवन को स्वर्गतुल्य बनाता हूँ। [१] मैं स्वस्थ मस्तिष्क व स्वस्थ शरीरवाला बनूँ, [२] हम लोलुपता - शून्य ऐश्वर्यवाले हों, [३] आचार्यों का उपदेश हमारे जीवनों से अशुभवृत्तियों को दूर करे, [४] हमारे जीवन में ज्ञान व भक्ति का समन्वय हो, [५] यज्ञाग्नि व सूर्यरश्मियाँ मिलकर वायुमण्डल के शोधक हों, [६] प्राणसाधना हमारे जीवन को पवित्र व सशक्त बनाये, [७] सोम का भरण हमारे जीवन को सफल करे, [८] हम संविभाग की वृत्ति से प्रभु का उपासन करनेवाले बनें, [९] हम जैत्र क्रतु को प्राप्त करें, [१०] हम देवों की तरह 'महान्, बृहत् व अनर्वा' बनें, [११] प्रभु की प्रेरणा में चलें, [१२] स्नेह व निर्दोषतावाले हों, [१३] सविता से हमें सर्वताति प्राप्त हो और [१४] इस प्रकार हम 'सौर्य अभिलाषा' बन पायें।

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सविता पश्चातात्) सर्वोत्पादकः प्रेरकः परमात्माऽस्माकं पश्चादपि रक्षकः (सविता पुरस्तात्) सर्वोत्पादकः प्रेरकः परमात्माऽस्माकं पूर्वदिक्तश्च रक्षकः (सविताः-उत्तरात्तात्) सर्वोत्पादकः प्रेरकः परमात्माऽस्माकमुत्तरदिशश्च रक्षकः (सविता-अधरात्तात्) सर्वोत्पादकः परमात्माऽधो दिशश्च रक्षकः (सविता नः सर्वतातिं सुवतु) उत्पादकः प्रेरकः परमात्माऽस्मभ्यं सर्वकल्याणकरं वस्तूत्पादयतु प्रेरयतु-ददातु (सविताः नः दीर्घम्-आयुः रासताम्) सर्वोत्पादकः प्रेरकः परमात्माऽस्मभ्यं दीर्घं जीवनं ददातु ॥१४॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - May Savita protect us from behind. May Savita protect us in front. May Savita protect us from above. May Savita protect us from below. May Savita bless us all round, create and give us universal wealth of existence. May Savita bless us with a long, happy and full life.