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सम॑जैषमि॒मा अ॒हं स॒पत्नी॑रभि॒भूव॑री । यथा॒हम॒स्य वी॒रस्य॑ वि॒राजा॑नि॒ जन॑स्य च ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

sam ajaiṣam imā ahaṁ sapatnīr abhibhūvarī | yathāham asya vīrasya virājāni janasya ca ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सम् । अ॒जै॒ष॒म् । इ॒माः । अ॒हम् । स॒ऽपत्नीः॑ । अ॒भि॒ऽभूव॑री । यथा॑ । अ॒हम् । अ॒स्य । वी॒रस्य॑ । वि॒ऽराजा॑नि । जन॑स्य । च॒ ॥ १०.१५९.६

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:159» मन्त्र:6 | अष्टक:8» अध्याय:8» वर्ग:17» मन्त्र:6 | मण्डल:10» अनुवाक:12» मन्त्र:6


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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अहं सपत्नीः-अभिभूवरी) मैं विरोधिनी स्त्रियों को अभिभूत करनेवाली हूँ (इमाः सम् अजैषम्) इनको विजित करूँगी (अस्य वीरस्य जनस्य च) इस वीर पति के और इसके पारिवारिक जन के मध्य में (यथा अहं विराजानि) जिस प्रकार मैं विशेष राजमान रहूँ ॥६॥
भावार्थभाषाः - अपने पति और पति के परिवारिक जन मात्र के अन्दर ऐसे अपने गुण कर्म से विराजमान रहूँ, कोई विरोधी स्त्री न बन सके ॥६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

[१] (अहम्) = मैं (इमाः) = इन वासनाओं को (सं अजैषम्) = पूर्णरूप से पराजित करनेवाली बनूँ । मैं (सपत्नी:) = इन वासनारूप शत्रुओं को (अभिभूवरी) = अभिभूत करनेवाली होऊँ। [२] इन वासनाओं को मैं इसलिए अभिभूत करूँ (यथा) = जिससे कि (अहम्) = मैं (अस्य वीरस्य जनस्य) = इस वीर जन को (विराजानि) = विशिष्ट शोभावाली होऊँ। मेरे सन्तान वीर हों, शक्तियों का विस्तार करनेवाले हों । उन वीर सन्तानों से मैं शोभावाली बनूँ ।

पदार्थान्वयभाषाः - भावार्थ- वासनाओं का विजय करनेवाली माता वीर सन्तानों से शोभा को पाता है। सम्पूर्ण सूक्त आदर्श माता का चित्रण करता है। मुख्य बात वासनाओं के विजय की है। 'वासना विजय' ही माता को वीर सन्तानों की शोभा को प्राप्त कराती है । वासनाओं को पराजित करनेवाला व्यक्ति ही अपनी न्यूनताओं को दूर करके अपना पूरण करता है, सो 'पूरण: ' नामवाला होता है। यह सबके साथ स्नेह से वर्तनेवाला 'वैश्वामित्र: ' होता है। इसकी प्रार्थना है कि-
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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अहं सपत्नीः-अभिभूवरी) अहं शत्रुभूता अन्या देवीरभि-भवित्री खल्वस्मि (इमाः समजैषम्) इमा जेष्यामि (अस्य वीरस्य जनस्य च) अस्य वीरस्य पत्युर्जनस्य पारिवारिकजनस्य च मध्ये यथाहं (विराजानि) यथा प्रकारेणाहं विराजमाना भवेयम् ॥६॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - I, ruling presence, must win over all these rivals so that I might shine in the eyes of my master and shine and rule over this people.