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इ॒मा नु कं॒ भुव॑ना सीषधा॒मेन्द्र॑श्च॒ विश्वे॑ च दे॒वाः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

imā nu kam bhuvanā sīṣadhāmendraś ca viśve ca devāḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

इ॒मा । नु । क॒म् । भुव॑ना । सी॒स॒धा॒म॒ । इन्द्रः॑ । च॒ । विश्वे॑ । च॒ । दे॒वाः ॥ १०.१५७.१

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:157» मन्त्र:1 | अष्टक:8» अध्याय:8» वर्ग:15» मन्त्र:1 | मण्डल:10» अनुवाक:12» मन्त्र:1


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ब्रह्ममुनि

इस सूक्त में प्रजासुख के लिए वैद्यों न्यायाधीशों की नियुक्ति राजा करे, इत्यादि विषय हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (इमा भुवना) इन प्राणियों को (न कं सीषधाम) अवश्य स्वानुकूल बनावें (इन्द्रः-च) राजा और (विश्वेदेवाः-च) सब विद्वान् जो हैं, उन्हें भी स्वानुकूल बनावें ॥१॥
भावार्थभाषाः - राष्ट्र के प्रजाजन समस्त प्राणियों से उचित लाभ लें और राजा तथा विद्वानों को भी यथायोग्य आचरण से अनुकूल बनाकर लाभ लें ॥१॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

त्रिलोकी का आधिपत्य

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हम (नु) = अब (इमा) = इन (भुवना) = शरीर, मन व मस्तिष्क रूप लोकों को (सीषधाम्) = साधित करें, इन्हें अपने वश में करें। शरीर, मन व मस्तिष्क पर हमारा आधिपत्य हो। [२] इस वशीकरण प्रक्रिया के होने पर (इन्द्रः च) = वह परमैश्वर्यशाली प्रभु (च) = और (विश्वेदेवाः) = सूर्य, चन्द्र, नक्षत्र, पृथिवी, जल, तेज, वायु आदि सब देव (कम्) = सुख को [सीषधाम - साधयत सा० ] सिद्ध करें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हमारा अपनी शरीर, मन, मस्तिष्क रूप त्रिलोकी पर आधिपत्य हो । सूर्य आदि सब देवों के द्वारा प्रभु हमें सुखी करें।
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ब्रह्ममुनि

अत्र सूक्ते प्रजासुखाय राज्ञा वैद्यन्यायाधीशानां नियुक्तिः कार्येत्येवमादयो विषयाः सन्ति।

पदार्थान्वयभाषाः - (इमा भुवना नु कं सीषधाम) एतानि भूतानि प्राणिजातानि खल्ववश्यं स्वानुकूले साधयाम, (इन्द्रः-च विश्वेदेवाः-च) तथा राजा च सर्वे विद्वांसश्च ये सन्ति तानपि स्वानुकूले कुर्मः ॥१॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Let us proceed, study and win our goals, successfully and peacefully, across these regions of the world, study and harness electric energy, and let all divine forces of nature and nobilities of humanity be favourable to us.