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त्राय॑न्तामि॒ह दे॒वास्त्राय॑तां म॒रुतां॑ ग॒णः । त्राय॑न्तां॒ विश्वा॑ भू॒तानि॒ यथा॒यम॑र॒पा अस॑त् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

trāyantām iha devās trāyatām marutāṁ gaṇaḥ | trāyantāṁ viśvā bhūtāni yathāyam arapā asat ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

त्राय॑न्ताम् । इ॒ह । दे॒वाः । त्राय॑ताम् । म॒रुता॑म् । ग॒णः । त्राय॑न्ताम् । विश्वा॑ । भू॒तानि॑ । यथा॑ । अ॒यम् । अ॒र॒पाः । अस॑त् ॥ १०.१३७.५

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ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:137» मन्त्र:5 | अष्टक:8» अध्याय:7» वर्ग:25» मन्त्र:5 | मण्डल:10» अनुवाक:11» मन्त्र:5


ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इह) इस परिवार में (देवाः) रश्मियाँ (त्रायन्ताम्) रोगी की रक्षा करें (मरुतां गणः) वायुओं का गण भी (त्रायताम्) रक्षा करे (विश्वा भूतानि) सारे पृथिवी आदि भूत (त्रायन्ताम्) रक्षा करें (यथा-अयम्-अरपाः-असत्) जिससे यह रोगरहित हो जावे ॥५॥
भावार्थभाषाः - इस परिवार में रोगी की सूर्यकिरणें रक्षा करें, वायुएँ रक्षा करें, सब पृथिवी आदि रक्षा करें, जिससे यह रोगरहित हो जावे ॥५॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वैद्य की प्रार्थना

पदार्थान्वयभाषाः - [१] वैद्य रोगी के लिए यही प्रार्थना करता है कि (इह) = इस स्थिति में (देवा:) = सब अग्नि आदि देव (त्रायन्ताम्) = इसका रक्षण करें। उनकी अनुकूलता से यह स्वास्थ्य लाभ करे। (मरुतां गणः) = प्राणों का गण इसे (त्रायताम्) = रक्षित करे । अर्थात् गहरा श्वास लेता हुआ यह अपने में शक्ति को भरे और अन्दर की वायु को सुदूर फेंकता हुआ यह दोषों को दूर करे। [२] (विश्वा भूतानि) = पृथिवी आदि सब भूत (त्रायन्ताम्) = इसका रक्षण करें। सब पञ्चभूत इसके अनुकूल हों और यह स्वास्थ्य का लाभ करे । (यथा) = जिससे (अयम्) = यह (अरपा:) = दोषरहित शरीरवाला (असत्) = हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सूर्यादि सब देवों व प्राणों तथा पञ्चभूतों की अनुकूलता से शरीर निर्दोष हो ।

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इह) अस्मिन् परिवारे (देवाः-त्रायन्ताम्) रश्मयो रुग्णं रक्षन्तु (मरुतां गणः-त्रायताम्) वायूनां गणोऽपि रक्षतु (विश्वा भूतानि त्रायन्ताम्) सर्वाणि भूतानि रक्षन्तु (यथा-अयम्-अरपाः-असत्) यथाऽयं रोगरहितो भवेत् ॥५॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - May the divinities save us here in body and mind. May the forces of Maruts, air, breeze, wind and even storm protect us. May all forms of nature and living beings protect and promote us so that this body system may be fine, free and immaculate.