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आ त्वा॑गमं॒ शंता॑तिभि॒रथो॑ अरि॒ष्टता॑तिभिः । दक्षं॑ ते भ॒द्रमाभा॑र्षं॒ परा॒ यक्ष्मं॑ सुवामि ते ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ā tvāgamaṁ śaṁtātibhir atho ariṣṭatātibhiḥ | dakṣaṁ te bhadram ābhārṣam parā yakṣmaṁ suvāmi te ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

आ । त्वा॒ । अ॒ग॒म॒म् । शन्ता॑तिऽभिः । अथो॒ इति॑ । अ॒रि॒ष्टता॑तिऽभिः । दक्ष॑म् । ते॒ । भ॒द्रम् । आ । अ॒भा॒र्ष॒म् । परा॑ । यक्ष्म॑म् । सु॒वा॒मि॒ ते ॥ १०.१३७.४

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ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:137» मन्त्र:4 | अष्टक:8» अध्याय:7» वर्ग:25» मन्त्र:4 | मण्डल:10» अनुवाक:11» मन्त्र:4


ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (त्वा) हे रोगिन् ! तुझे (शन्तातिभिः) कल्याणकर उपायों से (अथ-उ-अरिष्टतातिभिः) और न पीड़ित करनेवाले रोगरहित करनेवाले उपायों-से मैं आता हूँ (ते) तेरे लिए (दक्षं भद्रम्) बल और कल्याण को (आभार्षम्) लाया हूँ आभरित करता हूँ (ते यक्ष्मम्) तेरे रोग को (परा सुवामि) दूर करता हूँ ॥४॥
भावार्थभाषाः - रोगी को चिकित्सक औषध प्रदान करता हुआ आश्वासन भी दे कि मैं ऐसी औषध दे रहा हूँ, जो शान्ति देनेवाली रोग को हटानेवाली हैं, उनके द्वारा बल और कल्याण तेरे अन्दर भरता हूँ और रोग को हरता हूँ ॥४॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वैद्य का प्राक्कथन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] वैद्य रोगी के पास आता है और कहता है कि (त्वा आगमम्) = मैं तेरे समीप आया हूँ । (शन्तातिभिः) = इन रोग की शान्तिकारक औषधों के साथ (अव्य उ) = और निश्चय से (अरिष्टतातिभिः) = अहिंसा का विस्तार करनेवाली औषधों के साथ । [२] बस, मैं आ गया हूँ और (ते) = तेरे लिए (भद्रम्) = कल्याण व सुख के देनेवाले (दक्षम्) = बल को (आभार्षम्) = प्राप्त कराता हूँ और (ते) = तेरे (यक्ष्मम्) = रोग को परासुवामि दूर करता हूँ । इस प्रकार वैद्य रोगी को उत्साह की प्रेरणा देकर उत्साहित करता है । उसे स्वस्थ मन का बनाकर नीरोग बनाने के लिए यत्नशील होता है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- वैद्य रोगी को इस प्रकार प्रेरणा देता है कि वह उस प्रेरणा से ही उत्साह सम्पन्न होकर रोगभय से ऊपर उठ जाता है।

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (त्वा) हे रोगिन् ! त्वां (शन्तातिभिः-अथ-उ-अरिष्टतातिभिः) शङ्करैस्तथाऽहिंसितकरैः पीडानिवारकैरुपायैः सहाहमागच्छामि “शिवशमरिष्टस्य करे” [अष्टा० ४।४।१४३] (ते) तुभ्यं (दक्षं भद्रम्-आ अभार्षम्) बलं कल्याणमानीतवान् (ते यक्ष्मं परा सुवामि) तव रोगं परा नयामि दूरीकरोमि ॥४॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - I am come with all palliatives and protectives for peace and tranquillity. I bring you auspicious, resistant and regenerative vitality and root out all debility.