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यू॒यं विश्वं॒ परि॑ पाथ॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । यु॒ष्माकं॒ शर्म॑णि प्रि॒ये स्याम॑ सुप्रणीत॒योऽति॒ द्विष॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yūyaṁ viśvam pari pātha varuṇo mitro aryamā | yuṣmākaṁ śarmaṇi priye syāma supraṇītayo ti dviṣaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यू॒यम् । विश्व॑म् । परि॑ । पा॒थ॒ । वरु॑णः । मि॒त्रः । अ॒र्य॒मा । यु॒ष्माकम् । शर्म॑णि । प्रि॒ये । स्याम॑ । सु॒ऽप्र॒नी॒त॒यः॒ । अति॑ । द्विषः॑ ॥ १०.१२६.४

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ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:126» मन्त्र:4 | अष्टक:8» अध्याय:7» वर्ग:13» मन्त्र:4 | मण्डल:10» अनुवाक:10» मन्त्र:4


ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (वरुणः-मित्रः-अर्यमा) पूर्वोक्त वरुण, मित्र, अर्यमा (यूयं विश्वं परि पाथ) तुम सब सब ओर से रक्षा करो (युष्माकम्) तुम्हारे (प्रिये शर्मणि) अच्छे सुख शरण में (सुप्रणीतयः) शोभन आचरणवाले (द्विषः-अति) द्वेष करनेवाले विरोधियों को अतिक्रमण करके-दूर करके (स्याम) समर्थ होवें ॥४॥
भावार्थभाषाः - उन्हीं पूर्वोक्त मित्रादियों की अनुकूलता में सदाचारी बने हुए द्वेष करनेवाले विरोधियों से बचकर सुरक्षित रहें ॥४॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

उत्तम भावनाओं से प्रेरित होकर [चलें]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (वरुणः मित्र अर्यमा) = वरुण, मित्र और अर्यमा (यूयम्) = आप (विश्वम्) = सम्पूर्ण जगत् को (परिपाथ) = समन्तात् रक्षित करते हो । 'वरुण' हमें क्रोध से बचाता है, 'मित्र' काम के आक्रमण से हमारा रक्षण करता है और 'अर्यमा' हमें लोभ में नहीं फँसने देता। [२] हे वरुण, मित्र और अर्यमा! हम (युष्माकम्) = आपकी (प्रिये) = प्रिय (शर्मणि) = शरण में प्राप्त होनेवाले सुख में (स्याम) = हों । (सुप्रणीतयः) = हम उत्तम प्रणयनोंवाले हों। हमें आप सदा उत्तम मार्गों से ले चलिये । (द्विषः अति) = हमें ईर्ष्या-द्वेष-क्रोध की भावनाओं से पार ही करिये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - क्रोध, काम व लोभ से दूर रहते हुए हम सुरक्षित हों। हम कामादि से दूर होकर उत्तम भावनाओं से ही कार्यों में प्रवृत्त हों । द्वेषों से सदा दूर रहें।

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (वरुणः-मित्रः-अर्यमा यूयं विश्वं परि पाथ) हे वरुण ! मित्र ! अर्यमन् ! यूयं सर्वेऽस्मान् परिरक्षथ (युष्माकं प्रिये शर्मणि) युष्माकं प्रियसुखशरणे (सुप्रणीतयः) शोभनप्रणयनवन्तः-सदाचरणवन्तः (द्विषः-अति-स्याम) द्वेष्टॄन् विरोधिनोऽतिक्रम्य परास्य समर्था भवेम ॥४॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Mitra, Varuna and Aryama, you protect, guide and lead the world to their goal of success and fulfilment. We pray, under the loving care, security and felicity of your law and order, let us advance to our cherished goal, pursuing noble ethics and policies beyond the wicked.