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गो॒त्र॒भिदं॑ गो॒विदं॒ वज्र॑बाहुं॒ जय॑न्त॒मज्म॑ प्रमृ॒णन्त॒मोज॑सा । इ॒मं स॑जाता॒ अनु॑ वीरयध्व॒मिन्द्रं॑ सखायो॒ अनु॒ सं र॑भध्वम् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

gotrabhidaṁ govidaṁ vajrabāhuṁ jayantam ajma pramṛṇantam ojasā | imaṁ sajātā anu vīrayadhvam indraṁ sakhāyo anu saṁ rabhadhvam ||

पद पाठ

गो॒त्रऽभिद॑म् । गो॒ऽविद॑म् । वज्र॑ऽबाहुम् । जय॑न्तम् । अज्म॑ । प्र॒ऽमृ॒णन्त॑म् । ओज॑सा । इ॒मम् । स॒ऽजा॒ताः॒ । अनु॑ । वी॒र॒य॒ध्व॒म् । इन्द्र॑म् । स॒खा॒यः॒ । अनु॑ । सम् । र॒भ॒ध्व॒म् ॥ १०.१०३.६

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ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:103» मन्त्र:6 | अष्टक:8» अध्याय:5» वर्ग:22» मन्त्र:6 | मण्डल:10» अनुवाक:9» मन्त्र:6


ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सजाताः) हे समान राष्ट्रिय समृद्धिकर्मों में प्रसिद्ध (सखायः) परस्पर मित्र बने सैनिको ! तुम (इमम्) इस (गोत्रभिदम्) शत्रुओं के गोत्रों-वंशों के नाशक (वज्रबाहुम्) शस्त्रपाणि-भुजाओं-हाथों में शस्त्र जिसके हैं, ऐसे शस्त्रधारी (अज्म जयन्तम्) संग्राम जीतते हुए संग्रामविजेता (ओजसा) बल से (प्रमृणन्तम्) प्रहारकर्ता (इन्द्रम्-अनु) राजा के अनुसार (वीरयध्वम्) वीरकर्म करो (अनु सं रभध्वम्) उसके अनुशासन को मानते हुए शिविर में तैयार रहो ॥६॥
भावार्थभाषाः - शत्रुओं का वंशोच्छेदकर्ता शस्त्रधारी संग्रामजेता प्रहारक राजा होना चाहिए तथा सैनिक जन राष्ट्रिय समृद्धि कार्यों में प्रसिद्ध परस्पर मित्र राजा के अनुसार वीरता दिखाने-वाले उसके अनुशासन को मानते हुए शिविर में तैयार रहने चाहिये ॥६॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

इन्द्र बनो

पदार्थान्वयभाषाः - प्रभु कहते हैं - हे (सजाता:) = समान जन्मवाले जीवो ! (इयम्) = इस इन्द्र के (अनुवीरयध्वम्) = अनुसार तुम भी वीरतापूर्ण कर्म करो। इस इन्द्र के जो १. (गोत्रभिदम्) = (गोत्र = wealth) धन का विदारण करनेवाला है, अर्थात् हिरण्मय पात्र द्वारा डाले जानेवाले आवरण को सुदूर नष्ट करनेवाला है । २. (गोविदम्) = ज्ञान को प्राप्त करनेवाला है। धन के लोभ को दूर करके ही ज्ञान प्राप्त होता है । ३. (वज्रबाहुम्) = जिसकी बाहु में वज्र है, 'वज गतौ' से वज्र बनता है, 'बाह्र प्रयत्ने' से बाहु । वज्रबाहु की भावना यही है कि गतिशील होने के कारण जो सदा प्रयत्नशील है । ४. (अज्म जयन्तम्) = युद्ध को जीतनेवाला है। निरन्तर क्रियाशीलता ने ही इसे वासना-संग्राम में विजयी बनाया है । ५. (ओजसा प्रमृणन्तम्) = जो [क्रियाशीलता से उत्पन्न] ओज के द्वारा काम-क्रोधादि शत्रुओं को कुचल रहा है। वस्तुतः इन पाँच विशेषताओंवाला व्यक्ति ही इन्द्र है और इस इन्द्र के समान जन्म लेनेवाले सभी को चाहिए कि वे भी इन्द्र के समान ही वीर बनें और संग्राम में शत्रुओं को कुचल डालें। प्रभु कहते हैं कि हे (सखायः) = इन्द्र के समान ख्यानवाले जीवो! (इन्द्रम् अनु) = इस इन्द्र के अनुसार (संरभध्वम्) = दृढाङ्ग Robust बनो, बहादुरी का परिचय दो। इन्द्र असुरों का संहार करता है तुम भी उसके (सजात) = समान जन्मवाले (सखा) = समान ख्यान - [नाम] - वाले होते हुए क्या ऐसा न करोगे? इन्द्र के कर्म सदा बलवाले हैं। क्या तुम निर्बलता प्रकट करोगे ? नहीं, तुम भी उसके अनुसार वीर बनो । जो इन्द्र ने किया है वह तुम भी कर सकते हो। तुम भी तो इन्द्र हो- तभी तो महेन्द्र [परमात्मा] के उपासक बने हो । प्रभु का उपासक कायर नहीं होता, अतः वीर बनो, बहादुरी का परिचय दो और वासनारूप शत्रुओं को कुचल डालो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम इन्द्र हैं - हम असुरों का संहार करनेवाले हैं। धन के आकर्षण से हम ऊपर उठेंगे और ऊँचे-से-ऊँचे ज्ञान को प्राप्त करेंगे।
अन्य संदर्भ: नोट—यह इन्द्र भी तुम्हारे जैसा ही एक मनुष्य है, (सजाता:) = तुम इसके समान जन्मवाले हो सखायः- तुम इसके समान ख्यानवाले हो । एक ही योनि में तुमने जन्म लिया है, एक ही शिक्षणालय में तुमने शिक्षा पाई है, वह विजेता बना है-उसने धन के complex को जीत लिया है। तुम भी धन से तो नहीं, परन्तु धन के लोभ से ऊपर उठकर वेदज्ञान को प्राप्त करनेवाले बनो ।

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सजाताः) हे समानराष्ट्रियसमृद्धिकर्मसु प्रसिद्धाः ! (सखायः) परस्परसखिभूताः सैनिकाः ! यूयम् (इमम्) एतं (गोत्रभिदम्) शत्रूणां गोत्राणां वंशान् यो भिनत्ति तम् “गोत्रभिदं यः शत्रूणां गोत्राणि भिनत्ति तम्” [यजु० १७।३८ दयानन्दः] (वज्रबाहुम्) शस्त्रपाणिं (अज्म जयन्तम्) सङ्ग्रामं जयन्तम् “अज्म सङ्ग्रामनाम” [निघ० २।१७] (गोविदम्) राष्ट्रभूमेर्लब्धारं प्राप्तराज्यं (ओजसा) बलेन (प्रमृणन्तम्) प्रहारकर्त्तारं (इन्द्रम्-अनु) राजानमनुसृत्य (वीरयध्वम्) वीरकर्म कुरुत (अनु सं रभध्वम्) तदनुशासनमाचरन्तः शिविरे सज्जीभूतास्तिष्ठत ॥६॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O friends, unite, prepare and mount the assault with Indra, our friend and comrade, breaker of enemy strongholds, winner of lands, hero of thunder arms and victorious breaker of dark mighty clouds by his valour. Follow the brave and advance.