क॒दा क्ष॑त्र॒श्रियं॒ नर॒मा वरु॑णं करामहे। मृ॒ळी॒कायो॑रु॒चक्ष॑सम्॥
kadā kṣatraśriyaṁ naram ā varuṇaṁ karāmahe | mṛḻīkāyorucakṣasam ||
क॒दा। क्ष॒त्र॒ऽश्रिय॑म्। नर॑म्। आ। वरु॑णम्। क॒रा॒म॒हे॒। मृ॒ळी॒काय॑। उ॒रु॒ऽचक्ष॑सम्॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर वह वरुण कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
बल , उन्नति व ज्ञान
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनः स वरुणः कीदृशोऽस्तीत्युपदिश्यते॥
वयं कदा मृळीकायोरुचक्षसं नरं वरुणं परमेश्वरं संसेव्य क्षत्रश्रियं करामहे॥५॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
How is that Varuna (God) is further taught in the 5th Mantra.
When shall we for our happiness enjoy the prosperity of the vast and good government by taking shelter in Varuna (God) Who is infallible, the Guide of men and Who is variously glorified in the Vedas.
