अ॒भि त्वा॑ देव सवित॒रीशा॑नं॒ वार्या॑णाम्। सदा॑वन्भा॒गमी॑महे॥
abhi tvā deva savitar īśānaṁ vāryāṇām | sadāvan bhāgam īmahe ||
अ॒भि। त्वा॒। दे॒व॒। स॒वि॒तः॒। ईशा॑नम्। वार्या॑णाम्। सदा॑। अ॒व॒न्। भा॒गम्। ई॒म॒हे॒॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर वह जगदीश्वर कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
वार्य - वस्तुओं के ईशान
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनः स कीदृश इत्युपदिश्यते।
हे सवितरवन् देव जगदीश्वर ! वयं वार्य्याणामीशानं भागं त्वा त्वां सदाऽभीमहे॥३॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
What is the nature of that God is taught in the next Mantra.
O Creator and ever Protector God, We pray to Thee who art the Lord of the earth and other acceptable or useful things, the Superintendent of the Universe and Adorable.
