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सु॒ता इन्द्रा॑य व॒ज्रिणे॒ सोमा॑सो॒ दध्या॑शिरः । प॒वित्र॒मत्य॑क्षरन् ॥

English Transliteration

sutā indrāya vajriṇe somāso dadhyāśiraḥ | pavitram aty akṣaran ||

Pad Path

सु॒ताः । इन्द्रा॑य । व॒ज्रिणे॑ । सोमा॑सः । दधि॑ऽआशिरः । प॒वित्र॑म् । अति॑ । अ॒क्ष॒र॒न् ॥ ९.६३.१५

Rigveda » Mandal:9» Sukta:63» Mantra:15 | Ashtak:7» Adhyay:1» Varga:32» Mantra:5 | Mandal:9» Anuvak:3» Mantra:15


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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सुताः सोमासः) स्वयंसिद्ध परमात्मा (अतिपवित्रं दध्याशिरः) जो सर्वोपरि पवित्रता का अधिकरण है, वह (इन्द्राय वज्रिणे) कर्मयोगी पुरुष के लिये (अक्षरन्) परमानन्द की वृष्टि करता है ॥१५॥
Connotation: - परमात्मा कर्मयोगी पुरुष के लिये आनन्द की वृष्टि करता है। इसका तात्पर्य यह है कि उद्योगी पुरुषों के लिये परमात्मा सदैव आनन्द का प्रदान करता है। यद्यपि परमात्मा का आनन्द सबके सन्निहित है, तथापि उसके आनन्द को उद्योगी कर्मयोगी ही लाभ कर सकते हैं। इस अपूर्वता का इस मन्त्र में उपदेश किया गया है ॥१५॥
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (सुताः सोमासः) स्वयंसिद्धः परमात्मा (अतिपवित्रं दध्याशिरः) यः सर्वोपरि पवित्रताधिकरणः स परमेश्वरः (इन्द्राय वज्रिणे) कर्मयोगिपुरुषेभ्यः (अक्षरन्) परमानन्दस्य वृष्टिं करोति ॥१५॥