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सोमा॑ असृग्रमा॒शवो॒ मधो॒र्मद॑स्य॒ धार॑या । अ॒भि विश्वा॑नि॒ काव्या॑ ॥

English Transliteration

somā asṛgram āśavo madhor madasya dhārayā | abhi viśvāni kāvyā ||

Pad Path

सोमाः॑ । अ॒सृ॒ग्र॒म् । आ॒शवः॑ । मधोः॑ । मद॑स्य । धार॑या । अ॒भि । विश्वा॑नि । काव्या॑ ॥ ९.२३.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:23» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:13» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:1


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ARYAMUNI

अब उक्त रचना को प्रकारान्तर से वर्णन करते हैं।

Word-Meaning: - (सोमाः) “सूयन्ते=उत्पाद्यन्त इति सोमा ब्रह्माण्डानि” अनन्त प्रकार के कार्यरूप ब्रह्माण्ड (मधोः मदस्य) प्रकृति के हर्षजनक भावों की (धारया) सूक्ष्म अवस्था से (आशत) शीघ्र गतिवाले (असृग्रम्) बनाये गए हैं और (अभि विश्वानि काव्या) तदनन्तर सब प्रकार के वेदादि शास्त्रों की रचना हुई ॥१॥
Connotation: - परमात्मा ने प्रकृति की सूक्ष्मावस्था से कोटि-२ ब्रह्माण्डों को उत्पन्न किया और तदनन्तर उसने विधिनिषेधात्मक सब विद्याभण्डार वेदों को रचा।  जैसा कि “तस्माद्यज्ञात्सर्वहुत ऋचः सामानि जज्ञिरे” इत्यादि वेदमन्त्र और “जन्माद्यस्य यतः” इत्यादि सूत्रों से प्रतिपादन कर आये हैं ॥१॥
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ARYAMUNI

अथोक्तरचना प्रकारान्तरेण वर्ण्यते।

Word-Meaning: - (सोमाः) ब्रह्माण्डानि विविधानि (मधोः मदस्य) प्रकृतेः रञ्जकभावैः (धारया) सूक्ष्मावस्थाया (आशत) शीघ्रगमनशीलानि (असृग्रम्) सृष्टानि (अभि विश्वानि काव्या) ततश्च सर्वविधवेदादिशास्त्राणि निरमायिषत ॥१॥