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परि॒ प्रासि॑ष्यदत्क॒विः सिन्धो॑रू॒र्मावधि॑ श्रि॒तः । का॒रं बिभ्र॑त्पुरु॒स्पृह॑म् ॥

English Transliteration

pari prāsiṣyadat kaviḥ sindhor ūrmāv adhi śritaḥ | kāram bibhrat puruspṛham ||

Pad Path

परि॑ । प्र । अ॒सि॒स्य॒द॒त् । क॒विः । सिन्धोः॑ । ऊ॒र्मौ । अधि॑ । श्रि॒तः । का॒रम् । बिभ्र॑त् । पु॒रु॒ऽस्पृह॑म् ॥ ९.१४.१

Rigveda » Mandal:9» Sukta:14» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:8» Varga:3» Mantra:1 | Mandal:9» Anuvak:1» Mantra:1


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ARYAMUNI

अब उक्त परमात्मा के अन्य गुणों का वर्णन करते हैं।

Word-Meaning: - (सिन्धोः ऊर्मौ) जिसने समुद्र की लहरों का (अधि श्रितः) निर्माण किया (कारम् बिभ्रत् पुरुस्पृहम्) जिसने सर्वजनों के मनोरथरूप इस कार्यब्रह्माण्ड को बनाया (कविः) वही परमात्मा (परि प्रासिष्यदत्) सर्वत्र परिपूर्ण हो रहा है ॥१॥
Connotation: - उस परमात्मा ने इस ब्रह्माण्ड में नाना प्रकार की रचनाओं को बनाया है, कहीं महासागरों में अनन्त प्रकार की लहरें उठती हैं, कहीं हिमालय के उच्च शिखर नभोमण्डलवर्ती वायुओं से संघर्षण कर रहे हैं, एवं नाना प्रकार की रचनाओं का रचयिता वही परमात्मा है ॥१॥
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ARYAMUNI

अथोक्तपरमात्मनोऽन्ये गुणा वर्ण्यन्ते।

Word-Meaning: - (सिन्धोः ऊर्मौ) यः समुद्रतरङ्गाणां (अधि श्रितः) निर्माता (कारम् बिभ्रत् पुरुस्पृहम्) येन सर्वजनमनोरथरूपः संसारो निरमायि (कविः) स एव परमात्मा (परि प्रासिष्यदत्) सर्वत्र व्याप्नोति ॥१॥