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आदित्प्र॒त्नस्य॒ रेत॑सो॒ ज्योति॑ष्पश्यन्ति वास॒रम् । प॒रो यदि॒ध्यते॑ दि॒वा ॥

English Transliteration

ād it pratnasya retaso jyotiṣ paśyanti vāsaram | paro yad idhyate divā ||

Pad Path

आत् । इत् । प्र॒त्नस्य॑ । रेत॑सः । ज्योतिः॑ । प॒श्य॒न्ति॒ । वा॒स॒रम् । प॒रः । यत् । इ॒ध्यते॑ । दि॒वा ॥ ८.६.३०

Rigveda » Mandal:8» Sukta:6» Mantra:30 | Ashtak:5» Adhyay:8» Varga:14» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:2» Mantra:30


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SHIV SHANKAR SHARMA

परमदेव के अस्तित्व को इससे दृढ करते हैं।

Word-Meaning: - (आद्+इत्) ज्ञान होने के पश्चात् विद्वान् (प्रत्नस्य) पुरातन=शाश्वत (रेतसः) सबका बीजभूत परमात्मा के (वासरम्) वसानेवाले प्राणप्रद (ज्योतिः) ज्योति को (पश्यन्ति) देखते हैं। (यद्) जो ज्योति (दिवा+परः) द्युलोक से भी पर (इध्यते) प्रकाशित हो रहा है, जो परमात्मज्योति पृथिवी से लेकर सम्पूर्ण जगत् में विस्तीर्ण है, उसको विद्वान् देखते हैं। उसी से परमात्मा का अस्तित्व प्रतीत होता है ॥३०॥
Connotation: - जगत् का स्रष्टा परमात्मा कोई है, इसमें सन्देह नहीं। विद्वद्गण उसकी ज्योति को देखते हैं और हम लोगों से उसका उपदेश देते हैं ॥३०॥
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (यत्, दिवा, परः, इध्यते) जो यह परमात्मा अन्तरिक्ष से भी परे दीप्त हो रहा है (आत्, इत्) इसी से विद्वान् लोग (प्रत्नस्य, रेतसः) सबसे प्राचीन गतिशील परमात्मा के (ज्योतिः) ज्योतिर्मय रूप को (वासरम्, पश्यन्ति) सर्वत्र वासक देखते हैं ॥३०॥
Connotation: - जो परमात्मा अन्तरिक्ष से भी ऊर्ध्व देश में अपनी व्यापकता से देदीप्यमान हो रहा है, उसको विद्वान् लोग प्राचीन, गतिशील, ज्योतिर्मय तथा सर्वत्र वासक=व्यापक देखते हुए उसी की उपासना में तत्पर रहते हैं ॥३०॥
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SHIV SHANKAR SHARMA

परमदेवस्यास्तित्वं द्रढयति।

Word-Meaning: - आद्+इत्=ज्ञानानन्तरमेव विद्वांसः। प्रत्नस्य=पुराणस्य= शाश्वतस्य। रेतसः=बीजस्य=सर्वेषां बीजभूतस्य परमात्मनः। वासरम्=वासयितृ। यदाश्रित्य सर्वे प्राणिनः प्राणन्ति। तादृशं ज्योतिः=प्रकाशम्। पश्यन्ति। यज्ज्योतिः। दिवापर इध्यते=पृथिवीमारभ्य द्युलोकादप्यूर्ध्वं विततमस्ति। तज्ज्योतिः सूरयः पश्यन्तीत्यर्थः ॥३०॥
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (यत्, दिवा, परः, इध्यते) यतः सोन्तरिक्षात्परो दीप्यते (आत्, इत्) अत एव (प्रत्नस्य, रेतसः) पुरातनस्य गतिशीलस्य तस्य (ज्योतिः) ज्योतिष्मद्रूपम् (वासरम्) सर्वत्र वासकं (पश्यन्ति) पश्यन्ति विद्वांसः ॥३०॥