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अनु॒ पूर्वा॑ण्यो॒क्या॑ साम्रा॒ज्यस्य॑ सश्चिम । मि॒त्रस्य॑ व्र॒ता वरु॑णस्य दीर्घ॒श्रुत् ॥

English Transliteration

anu pūrvāṇy okyā sāmrājyasya saścima | mitrasya vratā varuṇasya dīrghaśrut ||

Pad Path

अनु॑ । पूर्वा॑णि । ओ॒क्या॑ । सा॒म्ऽरा॒ज्यस्य॑ । स॒श्चि॒म॒ । मि॒त्रस्य॑ । व्र॒ता । वरु॑णस्य । दी॒र्घ॒ऽश्रुत् ॥ ८.२५.१७

Rigveda » Mandal:8» Sukta:25» Mantra:17 | Ashtak:6» Adhyay:2» Varga:24» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:4» Mantra:17


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SHIV SHANKAR SHARMA

राज्यनियम पालनीय हैं, यह इससे दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - (दीर्घश्रुत्) बहुत दिनों से सुप्रसिद्ध (यद्वा) दूर-दूरों की बातों को सुननेवाले (मित्रस्य+वरुणस्य) ब्राह्मणप्रतिनिधि और राजप्रतिनिधि के किये हुए (साम्राज्यस्य) जो महाराज्य के (पूर्वाणि+ओक्या) अतिप्राचीन गृह्य नियम हैं और (व्रतानि) और उनके पालन के जो उपाय हैं, उनका (अनु+सश्चिम) हम लोग अनुसरण करें ॥१७॥
Connotation: - राज्यप्रतिनिधियों से स्थापित जो नियम और उपाय हैं, उनका प्रतिपालन करना सबको उचित है ॥१७॥
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SHIV SHANKAR SHARMA

राज्यनियमाः पालनीया इति दर्शयति।

Word-Meaning: - साम्राज्यस्य=राष्ट्रस्य। पूर्वाणि=पुरातनानि। ओक्या=गृह्याणि। ओको गृहम्। दीर्घश्रुत्=दीर्घश्रुतः। मित्रस्य वरुणस्य च। व्रतानि। अनुसश्चिम=अनुसरामः ॥१७॥