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त उ॒ग्रासो॒ वृष॑ण उ॒ग्रबा॑हवो॒ नकि॑ष्ट॒नूषु॑ येतिरे । स्थि॒रा धन्वा॒न्यायु॑धा॒ रथे॑षु॒ वोऽनी॑के॒ष्वधि॒ श्रिय॑: ॥

English Transliteration

ta ugrāso vṛṣaṇa ugrabāhavo nakiṣ ṭanūṣu yetire | sthirā dhanvāny āyudhā ratheṣu vo nīkeṣv adhi śriyaḥ ||

Pad Path

ते । उ॒ग्रासः॑ । वृष॑णः । उ॒ग्रऽबा॑हवः । नकिः॑ । त॒नूषु॑ । ये॒ति॒रे॒ । स्थि॒रा । धन्वा॑नि । आऽयु॑धा । रथे॑षु । वः॒ । अनी॑केषु । अधि॑ । श्रियः॑ ॥ ८.२०.१२

Rigveda » Mandal:8» Sukta:20» Mantra:12 | Ashtak:6» Adhyay:1» Varga:38» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:3» Mantra:12


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SHIV SHANKAR SHARMA

पुनः वही विषय आ रहा है।

Word-Meaning: - पुनः सेनाजन कैसे हों सो कहते हैं−(ते) वे सेनाजन (उग्रासः) सर्व कार्य्यों में परमोद्योगी हों, पुनः (वृषणः) शान्ति, रक्षा, धन आदि की वर्षिता हों, पुनः (उग्रवाहवः) बाहुबल के कारण उग्र हों अथवा जिनके बाहु सदा सर्वकार्य में उद्यत हों, किन्तु (तनूषु) निज शरीर के भरण-पोषण के लिये (नकिः) कदापि भी (येतिरे) चेष्टा न करें, क्योंकि उनके शरीर के पोषण की चिन्ता प्रजाएँ किया करें। तथा हे मरुद्गण ! (वः) आपके (रथेषु) रथों के ऊपर (धन्वानि) धनुष् और (आयुधा) वाण आदि आयुध (स्थिरा) दृढ़ हों, जिससे (अनीकेषु+अधि) सेनाओं में (श्रियः) विजयलक्ष्मी को प्राप्त हों ॥१२॥
Connotation: - सैनिक पुरुष परमोद्योगी हों, अपने शरीर की चिन्ता न करें। वे अच्छे-२ अस्त्रों से सुभूषित हों ॥१२॥
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (उग्रासः) बल से भरे हुए (वृषणः) रक्षाओं की वर्षा करनेवाले (उग्रवाहवः) कठोर भुजावाले (ते) वे सब योद्धा दूसरों के विरोध से (तनूषु) अपने शरीरों के (नकिः, येतिरे) भरण-पोषण का प्रयत्न नहीं करते, हे वीरो (वः) आपके (रथेषु) रथों में (धन्वानि) धनुष्=प्रक्षेपण साधन और (आयुधा) संप्रहारसाधन अस्त्र-शस्त्र (स्थिरा) दृढ रहते हैं, इससे (अनीकेषु) सेनाओं में (श्रियः) जयलक्ष्मी (अधि) अधिक होती है ॥१२॥
Connotation: - इस मन्त्र का भाव यह है कि बल से पूर्ण योद्धा जिनके वृषभ समान स्कन्ध, विशाल बाहु, कम्बुसमान ग्रीवा तथा धनुर्विद्याप्रधान योद्धाओं के अस्त्र-शस्त्रों में राजलक्ष्मी सदा निवास करती है ॥१२॥
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SHIV SHANKAR SHARMA

पुनस्तदनुवर्त्तते।

Word-Meaning: - उग्रासः=उद्गूर्णाः=निखिलकार्य्येषु उद्यताः। पुनः। वृषणः=शान्तिरक्षादीनां वर्षितारः। पुनः। उग्रबाहवः ते मरुद्गणाः। तनूषु=स्वकीयेषु शरीरेषु। नकिः=न कदापि। येतिरे=यतन्ताम्। स्वशरीरस्य भरणपोषणचिन्तां ते न कुर्वन्तीत्यर्थः। हे मरुतः। वः=युष्माकं रथेषु। धन्वानि=धनूंषि। आयुधा=आयुधानि आयोधनानि वाणादीनि। स्थिरा=स्थिराणि दृढानि। सन्तु। येन। अनीकेषु अधिसेनासु। सदा। श्रिय=विजयश्रियो भवेयुः ॥१२॥
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ARYAMUNI

Word-Meaning: - (उग्रासः) बलीयांसः (वृषणः) रक्षणस्य वर्षितारः (उग्रवाहवः) कठोरभुजाः (ते) ते मरुतः (तनूषु) स्वकीयतनूषु (नकिः) नहि (येतिरे) प्रयतन्ते परविरोधेन, हे शूराः (वः) युष्माकं (रथेषु) यानेषु (धन्वानि) धनूंषि (आयुधा) आयोधनकरणानि च (स्थिरा) दृढानि सन्ति अतः (अनीकेषु) सेनासु (श्रियः) जयश्रियः (अधि) अधिकं भवन्ति ॥१२॥