Go To Mantra
Viewed 414 times

ता नो॒ वाज॑वती॒रिष॑ आ॒शून्पि॑पृत॒मर्व॑तः। इन्द्र॑म॒ग्निं च॒ वोळ्ह॑वे ॥१२॥

English Transliteration

tā no vājavatīr iṣa āśūn pipṛtam arvataḥ | indram agniṁ ca voḻhave ||

Mantra Audio
Pad Path

ता। नः॒। वाज॑ऽवतीः। इषः॑। आ॒शून्। पि॒पृ॒त॒म्। अर्व॑तः। इन्द्र॑म्। अ॒ग्निम्। च॒। वोळ्ह॑वे ॥१२॥

Rigveda » Mandal:6» Sukta:60» Mantra:12 | Ashtak:4» Adhyay:8» Varga:29» Mantra:2 | Mandal:6» Anuvak:5» Mantra:12


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर मनुष्यों को किससे क्या करने योग्य है, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे मनुष्यो ! तुम जो (नः) हमारे लिये (वाजवतीः) प्रशस्त विज्ञानयुक्त (इषः) अन्नादि पदार्थों और (आशून्) शीघ्रगामी (अर्वतः) घोड़ों को (पिपृतम्) पूर्ण करते हैं (ता) उन (इन्द्रम्) बिजुली रूप अग्नि (अग्निम्, च) और प्रसिद्ध अग्नि को (वोळ्हवे) विमान आदि यानों को वहाने के लिये संग्र­ह करो ॥१२॥
Connotation: - हे मनुष्यो ! तुम बिजुली आदि पदार्थों से विमान आदि यानों को चलाकर इच्छाओं को पूर्ण करो ॥१२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वाजवती इषः, आशून् अर्वतः

Word-Meaning: - [१] (ता) = वे इन्द्र और अग्नि (नः) = हमारे लिये (वाजवतीः इषः) = प्रशस्त शक्तिवाली प्रेरणाओं को (पिपृतम्) = पूरित करें। अर्थात् हमें प्रकाशमय हृदय में प्रभु प्रेरणाओं को प्राप्त करायें और उन प्रेरणाओं को क्रियान्वित करने के लिये शक्ति दें। ये इन्द्र और अग्नि (आशून् अर्वतः) = शीघ्र गतिवाले इन्द्रियाश्वों को भी प्राप्त करायें। हमारी कर्मेन्द्रियाँ व ज्ञानेन्द्रियाँ दोनों ही उत्तम हों। [२] ये ज्ञानेन्द्रियाँ (अग्निम्) = प्रकाश की देवता को (वोढवे) = वहन करने के लिये हों, (च) = तथा कर्मेन्द्रियाँ (इन्द्रम्) = बल की देवता का वहन करें। ज्ञानेन्द्रियाँ ज्ञान को देनेवाली हों, तो कर्मेन्द्रियाँ शक्ति का वर्धन करनेवाली बनें।
Connotation: - भावार्थ- हम इन्द्र व अग्नि का आराधन करते हुए प्रशस्त प्रेरणाओं से युक्त बल को तथा शीघ्रता से कार्यों में व्याप्त होनेवाले इन्द्रियाश्वों को प्राप्त करें ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्मनुष्यैः केन किं कर्त्तव्यमित्याह ॥

Anvay:

हे मनुष्या ! यूयं यौ नो वाजवतीरिष आशूनर्वतः पिपृतं तेन्द्रमग्निं च वोळ्हवे सङ्गृह्णीत ॥१२॥

Word-Meaning: - (ता) तौ (नः) अस्मभ्यम् (वाजवतीः) प्रशस्तविज्ञानयुक्तान् (इषः) अन्नादीन् (आशून्) आशुगामिनः (पिपृतम्) पूरयेताम् (अर्वतः) अश्वान् (इन्द्रम्) विद्युतम् (अग्निम्) प्रसिद्धं पावकम् (च) (वोळ्हवे) विमानादियानानां वाहनाय ॥१२॥
Connotation: - हे मनुष्या ! यूयं विद्युदादिपदार्थैर्विमानादीनि यानानि चालयित्वेच्छाः पूरयत ॥१२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - May the two, Indra and Agni, electricity and fire, give us food and sustenance full of energy and excellence and provide us with modes of travel and transport. Let us too develop the fire and electricity, energy for transport and communication.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What should men do with whom-is told.

Anvay:

O men! take from all sides electricity and fire which fill us with good food along with admirable knowledge and speedy horses. Use them (electricity and fire) for driving aircraft and other vehicles.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O men! you fulfil your desires of driving aero planes and other vehicles with the help of electricity etc.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे माणसांनो ! तुम्ही विद्युत इत्यादी पदार्थांनी विमान वगैरे याने चालवून इच्छा पूर्ण करा. ॥ १२ ॥