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वरु॑णं वो रि॒शाद॑समृ॒चा मि॒त्रं ह॑वामहे। परि॑ व्र॒जेव॑ बा॒ह्वोर्ज॑ग॒न्वांसा॒ स्व॑र्णरम् ॥१॥

English Transliteration

varuṇaṁ vo riśādasam ṛcā mitraṁ havāmahe | pari vrajeva bāhvor jaganvāṁsā svarṇaram ||

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Pad Path

वरु॑णम्। वः॒। रि॒शाद॑सम्। ऋ॒चा। मि॒त्रम्। ह॒वा॒म॒हे॒। परि॑। व्र॒जाऽइ॑व। बा॒ह्वोः। ज॒ग॒न्वांसा॑। स्वः॑ऽनरम् ॥१

Rigveda » Mandal:5» Sukta:64» Mantra:1 | Ashtak:4» Adhyay:4» Varga:2» Mantra:1 | Mandal:5» Anuvak:5» Mantra:1


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब सात ऋचावाले चौसठवें सूक्त का प्रारम्भ है, इसके प्रथम मन्त्र में मित्रावरुण पदवाच्य विद्वानों के गुणों को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - जैसे (जगन्वांसा) जाते हुए प्राण और उदान वायु के सदृश वर्त्तमान जन (स्वर्णरम्) सुख को प्राप्त करानेवाले को (बाह्वोः) भुजाओं की (व्रजेव) चलते हैं जिससे उस गति से जैसे वैसे (वः) आप लोगों को स्वीकार करते हैं, वैसे हम लोग (रिशादसम्) शत्रुओं के रोकनेवाले (वरुणम्) उत्तम विद्वान् और (मित्रम्) मित्र का (ऋचा) स्तुति से (परि) सब ओर से (हवामहे) स्वीकार करते हैं ॥१
Connotation: - इस मन्त्र में उपमा और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। हे मनुष्यो ! जैसे विद्वान् जन प्रीति से आप लोगों का ग्रहण करते हैं, वैसे इनको आप लोग भी स्वीकार करिये ॥१
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथ मित्रावरुणपदवाच्यविद्वद्गुणानाह ॥

Anvay:

यथा जगन्वांसा मित्रावरुणौ स्वर्णरं बाह्वोर्व्रजेव वः स्वीकुरुतस्तथा वयं रिशादसं वरुणं मित्रमृचा परि हवामहे ॥१

Word-Meaning: - (वरुणम्) उत्तमं विद्वांसम् (वः) युष्मान् (रिशादसम्) शत्रुनिवारकम् (ऋचा) स्तुत्या (मित्रम्) सखायम् (हवामहे) स्वीकुर्महे (परि) सर्वतः (व्रजेव) व्रजन्ति यथा गत्या तद्वत् (बाह्वोः) भुजयोः (जगन्वांसा) गच्छन्तौ (स्वर्णरम्) यः स्वः सुखं नयति तम् ॥१
Connotation: - अत्रोपमावाचकलुप्तोपमालङ्कारौ । हे मनुष्या ! यथा विद्वांसः प्रीत्या युष्मान् गृह्णन्ति तथैतान् यूयमपि स्वीकुरुत ॥१
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MATA SAVITA JOSHI

या सूक्तात प्राण व उदानाप्रमाणे व विद्वानाच्या गुणांचे वर्णन करण्याने या सूक्ताच्या अर्थाची या पूर्वीच्या सूक्तार्थाबरोबर संगती जाणावी.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात उपमा व चाकलुप्तोपमालंकार आहेत. हे माणसांनो! जसे विद्वान लोक प्रेमाने तुमचा स्वीकार करतात तसा तुम्हीसुद्धा त्यांचा स्वीकार करा. ॥ १ ॥