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अ॒ग्निश्च॒ यन्म॑रुतो विश्ववेदसो दि॒वो वह॑ध्व॒ उत्त॑रा॒दधि॒ ष्णुभिः॑। ते म॑न्दसा॒ना धुन॑यो रिशादसो वा॒मं ध॑त्त॒ यज॑मानाय सुन्व॒ते ॥७॥

English Transliteration

agniś ca yan maruto viśvavedaso divo vahadhva uttarād adhi ṣṇubhiḥ | te mandasānā dhunayo riśādaso vāmaṁ dhatta yajamānāya sunvate ||

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Pad Path

अ॒ग्निः। च॒। यत्। म॒रु॒तः॒। वि॒श्व॒ऽवे॒द॒सः॒। दि॒वः। वह॑ध्वे। उत्ऽत॑रात्। अधि॑। स्नुऽभिः॑। ते। म॒न्द॒सा॒नाः। धुन॑यः। रि॒शा॒द॒सः॒। वा॒मम्। ध॒त्त॒। यज॑मानाय। सु॒न्व॒ते ॥७॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:60» Mantra:7 | Ashtak:4» Adhyay:3» Varga:25» Mantra:7 | Mandal:5» Anuvak:5» Mantra:7


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर मनुष्य क्या करें, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे मनुष्यो ! (यत्) जो (अग्निः) अग्नि के सदृश (विश्ववेदसः) सम्पूर्ण ऐश्वर्य्य से युक्त (दिवः) कामना करते हुए (रिशादसः) हिंसकों के नाश करनेवाले (मन्दसानाः) आनन्द करते हुए (धुनयः) दुष्टों के कम्पानेवाले (मरुतः) विचारशील मनुष्य आप लोग (सुन्वते) यज्ञ करने और (यजमानाय) पदार्थों के मेल करनेवाले जन के लिये (वामम्) प्रशंसा करने योग्य व्यवहार को (धत्त) धारण करो और (उत्तरात्) पीछे से (अधि) ऊपर के होने में (स्नुभिः) इच्छा वालों से प्रशंसा करने योग्य को (वहध्वे) प्राप्त हूजिये (ते, च) वे भी आप लोग सदा सब का उपकार करिये ॥७॥
Connotation: - इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है । वे ही महात्मा हैं, जो सब के लिये सत्य को धारण करते हैं ॥७॥
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्मनुष्याः किं कुर्य्युरित्याह ॥

Anvay:

हे मनुष्या ! यद्येऽग्निरिव विश्ववेदसो दिवो रिशादसो मन्दसानो धुनयो मरुतो यूयं सुन्वते यजमानाय वामं धत्त। उत्तरादधि ष्णुभिर्वामं वहध्वे ते च यूयं सदा सर्वानुपकुरुत ॥७॥

Word-Meaning: - (अग्निः) पावक इव (च) (यत्) ये (मरुतः) मननशीला मानवाः (विश्ववेदसः) समग्रैश्वर्य्याः (दिवः) कामयमानाः (वहध्वे) प्राप्नुत (उत्तरात्) पश्चात् (अधि) उपरिभावे (स्नुभिः) इच्छावद्भिः (ते) (मन्दसानाः) आनन्दन्तः (धुनयः) दुष्टानां कम्पकाः (रिशादसः) हिंसकानां नाशकाः (वामम्) प्रशस्यम् (धत्त) (यजमानाय) सङ्गन्त्रे (सुन्वते) यज्ञकर्त्रे ॥७॥
Connotation: - अत्र वाचकलुप्तोपमालङ्कारः । त एव महात्मानः सन्ति ये सर्वार्थं सत्यं दधति ॥७॥
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MATA SAVITA JOSHI

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Connotation: - या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. जे सर्वस्वी सत्य धारण करतात तेच महात्मे असतात. ॥ ७ ॥