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अच्छा॑ वो अ॒ग्निमव॑से दे॒वं गा॑सि॒ स नो॒ वसुः॑। रास॑त्पु॒त्र ऋ॑षू॒णामृ॒तावा॑ पर्षति द्वि॒षः ॥१॥

English Transliteration

acchā vo agnim avase devaṁ gāsi sa no vasuḥ | rāsat putra ṛṣūṇām ṛtāvā parṣati dviṣaḥ ||

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Pad Path

अच्छ॑। वः॒। अ॒ग्निम्। अव॑से। दे॒वम्। गा॒सि॒। सः। नः॒। वसुः॑। रास॑त्। पु॒त्रः। ऋ॒षू॒णाम्। ऋ॒तऽवा॑। प॒र्ष॒ति॒। द्वि॒षः ॥१॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:25» Mantra:1 | Ashtak:4» Adhyay:1» Varga:17» Mantra:1 | Mandal:5» Anuvak:2» Mantra:1


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब नव ऋचावाले पच्चीसवें सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में अग्निविषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे विद्वन् ! आप जिस (देवम्) प्रकाशमान (अग्निम्) अग्नि की (वः) आप लोगों के (अवसे) रक्षण आदि के लिये (अच्छा) उत्तम प्रकार (गासि) प्रशंसा करते हो (सः) वह (वसुः) द्रव्यदाता (ऋषूणाम्) वेदमन्त्रार्थ जानने वालों के (ऋतावा) सत्य का विभाग करनेवाला (पुत्रः) सन्तानरूप (द्विषः) शत्रुओं के (पर्षति) पार जाता है अर्थात् उनको जीतता है, वैसे ही (नः) हम लोगों के लिये (रासत्) देता है अर्थात् विजय दिलाता है ॥१॥
Connotation: - जैसे विद्वानों का श्रेष्ठ पुत्र विद्वान् होकर तथा लोभ आदि दोषों का त्याग करके पितृ आदिकों को सुख देता है, वैसे ही अग्नि उत्तम प्रकार सिद्धि किया गया सबको सुख देता है ॥१॥
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथाग्निविषयमाह ॥

Anvay:

हे विद्वंस्त्वं यं देवमग्निं वोऽवसेऽच्छा गासि स वसुर्ऋषूणामृतावा पुत्रो द्विषः पर्षतीव नो रासत् ॥१॥

Word-Meaning: - (अच्छा) सम्यक्। अत्र संहितायामिति दीर्घः। (वः) युष्माकम् (अग्निम्) पावकम् (अवसे) रक्षणाद्याय (देवम्) देदीप्यमानम् (गासि) प्रशंससि (सः) (नः) अस्मभ्यम् (वसुः) द्रव्यप्रदः (रासत्) ददाति (पुत्रः) अपत्यम् (ऋषूणाम्) मन्त्रार्थविदाम्। अत्र वर्णव्यत्ययेन इकारस्य स्थान उत्वम् (ऋतावा) सत्यस्य विभाजकः (पर्षति) पारयति (द्विषः) शत्रून् ॥१॥
Connotation: - यथा विदुषां सत्पुत्रो विद्वान् भूत्वा लोभादीन् दोषान्निवार्य्य पित्रादीन् सुखयति तथैवाऽग्निः संसाधितः सन् सर्वान् सुखयति ॥१॥
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MATA SAVITA JOSHI

या सूक्तात अग्नी व विद्वानांच्या गुणांचे वर्णन असल्यामुळे या सूक्ताच्या अर्थाची पूर्वसूक्तार्थाबरोबर संगती जाणावी.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जसा विद्वानाचा चांगला पुत्र विद्वान बनतो व लोभ इत्यादी दोषांचा त्याग करून पिता इत्यादींना सुख देतो. तसे उत्तम प्रकारे सिद्ध केलेला अग्नी सर्वांना सुख देतो. ॥ १ ॥