Go To Mantra

तम॑ध्व॒रेष्वी॑ळते दे॒वं मर्ता॒ अम॑र्त्यम्। यजि॑ष्ठं॒ मानु॑षे॒ जने॑ ॥२॥

English Transliteration

tam adhvareṣv īḻate devam martā amartyam | yajiṣṭham mānuṣe jane ||

Mantra Audio
Pad Path

तम्। अ॒ध्व॒रेषु॑। ई॒ळ॒ते॒। दे॒वम्। मर्ताः॑। अम॑र्त्यम्। यजि॑ष्ठम्। मानु॑षे। जने॑ ॥२॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:14» Mantra:2 | Ashtak:4» Adhyay:1» Varga:6» Mantra:2 | Mandal:5» Anuvak:1» Mantra:2


Reads times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

Word-Meaning: - जो (मर्ताः) मनुष्य (अध्वरेषु) नहीं नाश करने योग्य धर्मयुक्त व्यवहारों में (मानुषे) विचारशील (जने) जन में (तम्) उस (अमर्त्यम्) स्वरूप से नित्य (यजिष्ठम्) अतिशय मेल करनेवाले (देवम्) श्रेष्ठ गुणवाले अग्नि के सदृश स्वयं प्रकाशित परमात्मा की (ईळते) स्तुति करते हैं, वे ही बहुत सुख का भोग करते हैं ॥२॥
Connotation: - इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो मनुष्य अग्नि आदि पदार्थ के सदृश पदार्थविद्या को ग्रहण करते हैं, वे सब प्रकार सुखी होते हैं ॥२॥
Reads times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तेमव विषयमाह ॥

Anvay:

ये मर्त्ता अध्वरेषु मानुषे जने तममर्त्यं यजिष्ठं देवमग्निमिव स्वप्रकाशं परमात्मानमीळते ते हि पुष्कलं सुखमश्नुवते ॥२॥

Word-Meaning: - (तम्) (अध्वरेषु) अहिंसनीयेषु धर्म्येषु व्यवहारेषु (ईळते) स्तुवन्ति (देवम्) दिव्यगुणम् (मर्त्ताः) मनुष्याः (अमर्त्यम्) स्वरूपतो नित्यम् (यजिष्ठम्) अतिशयेन सङ्गन्तारम् (मानुषे) (जने) ॥२॥
Connotation: - अत्र वाचकलुप्तोपमालङ्कारः । ये मनुष्या अग्न्यादिपदार्थमिव पदार्थविद्यां गृह्णन्ति ते सर्वतः सुखिनो जायन्ते ॥२॥
Reads times

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. जी माणसे अग्नी इत्यादी पदार्थाप्रमाणे पदार्थविद्येचे ग्रहण करतात ती सर्व प्रकारे सुखी होतात. ॥ २ ॥