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अ॒स्मे रायो॑ दि॒वेदि॑वे॒ सं च॑रन्तु पुरु॒स्पृहः॑। अ॒स्मे वाजा॑स ईरताम् ॥७॥

English Transliteration

asme rāyo dive-dive saṁ carantu puruspṛhaḥ | asme vājāsa īratām ||

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Pad Path

अ॒स्मे इति॑। रायः॑। दि॒वेऽदि॑वे। सम्। च॒र॒न्तु॒। पु॒रु॒स्पृहः॑। अ॒स्मे इति॑। वाजा॑सः। ई॒र॒ता॒म्॥७॥

Rigveda » Mandal:4» Sukta:8» Mantra:7 | Ashtak:3» Adhyay:5» Varga:8» Mantra:7 | Mandal:4» Anuvak:1» Mantra:7


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब विद्वानों के पुरुषार्थ का फल कहते हैं ॥

Word-Meaning: - मनुष्य लोग (दिवेदिवे) प्रतिदिन (अस्मे) हम लोगों में (पुरुस्पृहः) बहुतों से चाहने योग्य (रायः) श्रेष्ठ लक्ष्मियाँ (सम्, चरन्तु) विलसें और (वाजासः) अन्न आदि ऐश्वर्य्यों के योग (अस्मे) हम लोगों को (ईरताम्) प्राप्त हों, ऐसी अभिलाषा करो ॥७॥
Connotation: - मनुष्यों को चाहिये कि सदा ही पुरुषार्थ से धन, अन्न, राज्य, प्रतिष्ठा और विद्या आदि उत्तम गुणों की उन्नति होती है, इस प्रकार निरन्तर इच्छा करनी चाहिये ॥७॥
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथ विद्वत्पुरुषार्थफलमाह ॥

Anvay:

मनुष्या दिवेदिवेऽस्मे पुरुस्पृहो रायः सञ्चरन्तु वाजासोऽस्मे ईरतामित्यभिलषन्तु ॥७॥

Word-Meaning: - (अस्मे) अस्मासु (रायः) शुभाः श्रियः (दिवेदिवे) प्रतिदिनम् (सम्) (चरन्तु) विलसन्तु (पुरुस्पृहः) बहुभिः स्पृहणीयाः (अस्मे) अस्मान् (वाजासः) अन्नाद्यैश्वर्य्ययोगाः (ईरताम्) प्राप्नुवन्तु ॥७॥
Connotation: - मनुष्यैः सदैव पुरुषार्थेन धनान्नराज्यप्रतिष्ठाविद्यादयः शुभगुणा उन्नता भवन्त्विति सततमेष्टव्याः ॥७॥
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MATA SAVITA JOSHI

N/A

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Connotation: - नेहमी पुरुषार्थाने धन, अन्न, राज्य, प्रतिष्ठा व विद्या इत्यादी उत्तम गुणांनी उन्नती होते, अशा प्रकारची माणसांनी सतत इच्छा करावी. ॥ ७ ॥