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अचि॑त्ती॒ यच्च॑कृ॒मा दैव्ये॒ जने॑ दी॒नैर्दक्षैः॒ प्रभू॑ती पूरुष॒त्वता॑। दे॒वेषु॑ च सवित॒र्मानु॑षेषु च॒ त्वं नो॒ अत्र॑ सुवता॒दना॑गसः ॥३॥

English Transliteration

acittī yac cakṛmā daivye jane dīnair dakṣaiḥ prabhūtī pūruṣatvatā | deveṣu ca savitar mānuṣeṣu ca tvaṁ no atra suvatād anāgasaḥ ||

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Pad Path

अचि॑त्ती। यत्। च॒कृ॒म। दैव्ये॑। जने॑। दी॒नैः। दक्षैः॑। प्रऽभू॑ती। पु॒रु॒ष॒त्वता॑। दे॒वेषु॑। च॒। स॒वि॒तः। मानु॑षेषु। च॒। त्वम्। नः॒। अत्र॑। सु॒व॒ता॒त्। अना॑गसः ॥३॥

Rigveda » Mandal:4» Sukta:54» Mantra:3 | Ashtak:3» Adhyay:8» Varga:5» Mantra:3 | Mandal:4» Anuvak:5» Mantra:3


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब विद्वानों के गुणों को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (सवितः) सम्पूर्ण जगत् के उत्पन्न करनेवाले ! (अचित्ती) अविद्या से (प्रभूती) बहुत्व से (दीनैः) क्षीण अर्थात् दुर्बल (दक्षैः) चतुरों से और (पूरुषत्वता) उत्तम पुरुषवान् से (दैव्ये) विद्वानों में चतुर (जने) विद्वान् में (देवेषु) विद्वानों (च) और (मानुषेषु) अविद्वानों में (च) भी (यत्) जो कर्म्म (चकृमा) हम लोग करें (अत्र) इस में (नः) हम (अनागसः) अनपराधियों को (त्वम्) आप (सुवतात्) प्रेरणा करो ॥३॥
Connotation: - हे विद्वानो ! आप लोग जो हम लोग अविद्या से आप लोगों का अपराध करें, वह क्षमा करने योग्य है और हम लोगों को अध्यापन और उपदेश से निरपराधी करो ॥३॥
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथ विद्वद्गुणानाह ॥

Anvay:

हे सवितरचित्ती प्रभूती दीनैर्दक्षैः पूरुषत्वता दैव्ये जने देवेषु च मानुषेषु च यच्चकृमाऽत्र नोऽनागसस्त्वं सुवतात् ॥३॥

Word-Meaning: - (अचित्ती) अचित्त्या अविद्यया (यत्) कर्म्म (चकृमा) कुर्य्याम। अत्र संहितायामिति दीर्घः। (दैव्ये) देवेषु विद्वत्सु कुशले (जने) विदुषि (दीनैः) क्षीणैः (दक्षैः) चतुरैः (प्रभूती) बहुत्वेन (पूरुषत्वता) उत्तमाः पुरुषा विद्यन्तेऽस्मिंस्तेन (देवेषु) विद्वत्सु (च) (सवितः) सकलजगदुत्पादक (मानुषेषु) अविद्वत्सु (च) (त्वम्) (नः) अस्मान् (अत्र) अस्मिन् (सुवतात्) प्रेरय (अनागसः) अनपराधिनः ॥३॥
Connotation: - हे विद्वांसो ! यूयं यद् वयमविद्यया युष्माकमपराधं कुर्याम स क्षन्तव्योऽस्मानध्यापनोपदेशाभ्यां निरपराधिनः कुरुत ॥३॥
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MATA SAVITA JOSHI

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Connotation: - हे विद्वानांनो ! आम्ही जर अविद्येमुळे तुमचा अपराध केला तर क्षमा करा व आम्हाला अध्यापनाने व उपदेशाने निरपराधी करा. ॥ ३ ॥