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अधा॑ ह॒ यद्व॒यम॑ग्ने त्वा॒या प॒ड्भिर्हस्ते॑भिश्चकृ॒मा त॒नूभिः॑। रथं॒ न क्रन्तो॒ अप॑सा भु॒रिजो॑र्ऋ॒तं ये॑मुः सु॒ध्य॑ आशुषा॒णाः ॥१४॥

English Transliteration

adhā ha yad vayam agne tvāyā paḍbhir hastebhiś cakṛmā tanūbhiḥ | rathaṁ na kranto apasā bhurijor ṛtaṁ yemuḥ sudhya āśuṣāṇāḥ ||

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Pad Path

अध॑। ह॒। यत्। व॒यम्। अ॒ग्ने॒। त्वा॒ऽया। प॒ड्ऽभिः। हस्ते॑भिः। च॒कृ॒म। त॒नूभिः॑। रथ॑म्। न। क्रन्तः॑। अप॑सा। भु॒रिजोः॑। ऋ॒तम्। ये॒मुः॒। सु॒ऽध्यः॑। आ॒शु॒षाणाः॥१४॥

Rigveda » Mandal:4» Sukta:2» Mantra:14 | Ashtak:3» Adhyay:4» Varga:18» Mantra:4 | Mandal:4» Anuvak:1» Mantra:14


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब प्रजाजन के कृत्य को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - हे (अग्ने) अग्नि के सदृश वर्त्तमान राजन् ! (त्वाया) आपको प्राप्त (सुध्यः) उत्तम बुद्धिवाले (आशुषाणाः) शीघ्र विभाग करनेवाले (वयम्) हम लोग (हस्तेभिः) हाथों (पड्भिः) पैरों और (तनूभिः) शरीरों से (यत्) जिस (रथम्) विमान आदि वाहन के (न) सदृश (चकृम) करें (अध) इसके अनन्तर (ह) निश्चय जो (अपसा) कर्म से (भुरिजोः) धारण और पोषण करनेवालों के (ऋतम्) सत्य को (येमुः) प्राप्त होवें उस विमान आदि वाहन के सदृश (क्रन्तः) क्रम से चलनेवाले हूजिये ॥१४॥
Connotation: - इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। मनुष्यों को चाहिये कि आलस्य त्याग के शरीरादिकों से पुरुषार्थ को सदा ही करके प्रजा और राज्य का धर्म से नियम करें, जिससे सब लोग धनयुक्त होवें ॥१४॥
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथ प्रजाजनकृत्यमाह ॥

Anvay:

हे अग्ने ! त्वाया सुध्य आशुषाणा वयं हस्तेभिः पड्भिस्तनूभिर्यद्यं रथं न चकृम। अध ह येऽपसा भुरिजोर्ऋत येमुस्तं रथं न त्वं क्रन्तो भव ॥१४॥

Word-Meaning: - (अध) अथ। अत्र निपातस्य चेति दीर्घः। (ह) किल (यत्) यम् (वयम्) (अग्ने) पावकवद्वर्त्तमान राजन् (त्वाया) त्वां प्राप्ता। अत्र विभक्तेराकारादेशः (पड्भिः) पादैः। अत्र वर्णव्यत्ययेन दस्य डः। (हस्तेभिः) (चकृम) कुर्याम। अत्र संहितायामिति दीर्घः। (तनूभिः) शरीरैः (रथम्) विमानादियानम् (न) इव (क्रन्तः) क्रमकः (अपसा) कर्मणा (भुरिजोः) धारकपोषकयोः (ऋतम्) सत्यम् (येमुः) यच्छेयुः (सुध्यः) शोभना धीर्येषान्ते (आशुषाणाः) सद्यो विभाजकाः ॥
Connotation: - अत्रोपमालङ्कारः। मनुष्यैरालस्यं विहाय शरीरादिभिः पुरुषार्थं सदैवाऽनुष्ठाय प्रजाराज्ययोर्धर्म्येण नियमः कर्त्तव्यो येन सर्व आढ्याः स्युः ॥१४॥
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MATA SAVITA JOSHI

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Connotation: - या मंत्रात उपमालंकार आहे. माणसांनी आळस त्यागून शरीर इत्यादींनी सदैव पुरुषार्थ करावा. प्रजेसाठी व राज्यासाठी धर्मपूर्वक नियम बनवावेत. ज्यामुळे सर्व लोक धनयुक्त व्हावेत ॥ १४ ॥