Go To Mantra

इ॒मे भो॒जा अङ्गि॑रसो॒ विरू॑पा दि॒वस्पु॒त्रासो॒ असु॑रस्य वी॒राः। वि॒श्वामि॑त्राय॒ दद॑तो म॒घानि॑ सहस्रसा॒वे प्र ति॑रन्त॒ आयुः॑॥

English Transliteration

ime bhojā aṅgiraso virūpā divas putrāso asurasya vīrāḥ | viśvāmitrāya dadato maghāni sahasrasāve pra tiranta āyuḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

इ॒मे। भो॒जाः। अङ्गि॑रसः। विऽरू॑पाः। दि॒वः। पु॒त्रासः॑। असु॑रस्य। वी॒राः। वि॒श्वामि॑त्राय। दद॑तः। म॒घानि॑। स॒ह॒स्र॒ऽसा॒वे। प्र। ति॒र॒न्ते॒। आयुः॑॥

Rigveda » Mandal:3» Sukta:53» Mantra:7 | Ashtak:3» Adhyay:3» Varga:20» Mantra:2 | Mandal:3» Anuvak:4» Mantra:7


Reads times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।

Word-Meaning: - हे राजन् ! जो (इमे) ये (अङ्गिरसः) प्राणों के सदृश बलयुक्त (भोजाः) भोजन करने तथा प्रजा के पालन करनेवाले (विरूपाः) अनेक प्रकार के रूप वा विकारयुक्त रूपवाले और (दिवः) प्रकाशस्वरूप (असुरस्य) शत्रुओं के फेंकनेवाले के (पुत्रासः) वायु के समान बलिष्ठ (वीराः) युद्धविद्या में परिपूर्ण (सहस्रसावे) संख्यारहित धन की उत्पत्ति जिसमें उस संग्राम में (विश्वामित्राय) संपूर्ण संसार मित्र है जिसका उसके लिये (मघानि) अतिश्रेष्ठ धनों को (ददतः) देते हुए जन (आयुः) जीवन का (प्र, तिरन्ते) उल्लङ्घन करते हैं वे ही लोग आपसे सत्कारपूर्वक रक्षा करने योग्य हैं ॥७॥
Connotation: - हे राजन् ! आप ऐसे वीरों के सहित प्रसन्न पुष्ट और युद्ध विद्या में कुशल सेना की वृद्धि करके सर्वदा विजय को प्राप्त होइये ॥७॥
Reads times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह।

Anvay:

हे राजन् ! य इमेऽङ्गिरस इव भोजा विरूपा दिवोऽसुरस्य पुत्रासो वीराः सहस्रसावे विश्वामित्राय मघानि ददतः सन्त आयुः प्र तिरन्ते त एव भवता सत्कृत्य रक्षणीयाः ॥७॥

Word-Meaning: - (इमे) (भोजाः) भोक्तारः प्रजापालकाः (अङ्गिरसः) प्राणा इव बलिष्ठाः (विरूपाः) विविधरूपा विकृतरूपा वा (दिवः) प्रकाशस्वरूपस्य (पुत्रासः) वायुरिव बलिष्ठाः (असुरस्य) शत्रूणां प्रक्षेपकस्य (वीराः) व्याप्तयुद्धविद्याः (विश्वामित्राय) विश्वं सर्वं जगन्मित्रं यस्य तस्मै (ददतः) (मघानि) अत्युत्तमानि धनानि (सहस्रसावे) सहस्रस्याऽसङ्ख्यस्य धनस्य सावः प्रसवो यस्मिन् सङ्ग्रामे (प्र) (तिरन्ते) उल्लङ्घन्ते (आयुः) जीवनम् ॥७॥
Connotation: - हे राजन् ! भवानीदृशैर्वीरैः सहितां हृष्टां पुष्टां युद्धविद्यायां कुशलां सेनामुन्नीय सर्वदा विजयस्व ॥७॥
Reads times

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे राजा! तू प्रसन्न, पुष्ट व युद्ध विद्येत कुशल वीरांसह सेनेची वृद्धी करून सदैव विजय प्राप्त कर. ॥ ७ ॥