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न साय॑कस्य चिकिते जनासो लो॒धं न॑यन्ति॒ पशु॒ मन्य॑मानाः। नावा॑जिनं वा॒जिना॑ हासयन्ति॒ न ग॑र्द॒भं पु॒रो अश्वा॑न्नयन्ति॥

English Transliteration

na sāyakasya cikite janāso lodhaṁ nayanti paśu manyamānāḥ | nāvājinaṁ vājinā hāsayanti na gardabham puro aśvān nayanti ||

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Pad Path

न। साय॑कस्य। चि॒कि॒ते॒। ज॒ना॒सः॒। लो॒धम्। न॒य॒न्ति॒। पशु॑। मन्य॑मानाः। न। अवा॑जिनम्। वा॒जिना॑। हा॒स॒य॒न्ति॒। न। ग॒र्द॒भम्। पु॒रः। अश्वा॑त्। न॒य॒न्ति॒॥

Rigveda » Mandal:3» Sukta:53» Mantra:23 | Ashtak:3» Adhyay:3» Varga:23» Mantra:3 | Mandal:3» Anuvak:4» Mantra:23


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं।

Word-Meaning: - हे राजन् ! जो वे (जनासः) वीरपुरुष (लोधम्) प्राप्त होनेवाले को (न) नहीं (नयन्ति) प्राप्त होते हैं (पशु) पशु के सदृश (मन्यमानाः) जानते हुए (वाजिना) घोड़े से (अवाजिनम्) घोड़े जिसमें नहीं ऐसे सङ्ग्राम को (न) नहीं (हासयन्ति) हराते हैं और (अश्वात्) घोड़े से (पुरः) प्रथम (गर्दभम्) लम्बे कानवाले गदहे को (न) नहीं (नयन्ति) प्राप्त कराते हैं उनको (सायकस्य) शस्त्रसमूह के दान से युक्त करने को आप (चिकिते) जानिये ॥२३॥
Connotation: - वे ही राजा के वीर श्रेष्ठ होवें कि जो युद्धविद्या को जान के सेनाओं के अङ्गों की यथावत् रक्षा स्थिर करने और युद्ध कराने को जानते हैं ॥२३॥
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह।

Anvay:

हे राजन् ! ये ते जनासो लोधं न नयन्ति पशु मन्यमाना वाजिना अवाजिनं न हासयन्ति। अश्वात्पुरो गर्द्दभं न नयन्ति ता सायकस्य दानेन युक्तान् कर्त्तुं भवान् चिकिते ॥२३॥

Word-Meaning: - (न) निषेधे (सायकस्य) शस्त्रसमूहस्य (चिकिते) जानातु (जनासः) वीराः (लोधम्) लोब्धारम्। अत्र वर्णव्यत्ययेन भस्य धः। (नयन्ति) प्राप्नुवन्ति (पशु) पशुमिव। अत्र सुपां सुलुगिति विभक्तेर्लुक्। (मन्यमानाः) विजानन्तः (न) निषेधे (अवाजिनम्) अविद्यमाना वाजिनो यत्र सङ्ग्रामे तम् (वाजिना) अश्वेन (हासयन्ति) (न) (गर्दभम्) लम्बकरणं खरम् (पुरः) (अश्वात्) (नयन्ति) ॥२३॥
Connotation: - त एव राज्ञो वीरा वराः स्युर्ये युद्धविद्यां विज्ञाय सेनाङ्गानि यथावद्रक्षितुं संस्थापयितुं योधयितुं जानन्ति ॥२३॥
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MATA SAVITA JOSHI

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Connotation: - तेच राजाचे वीर श्रेष्ठ असतात जे युद्ध विद्या जाणून सेनेच्या अंगांचे यथावत् रक्षण करणे व युद्ध करविणे जाणतात. ॥ २३ ॥