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अध॒ त्वमि॑न्द्र वि॒द्ध्य१॒॑स्मान्म॒हो रा॒ये नृ॑पते॒ वज्र॑बाहुः । रक्षा॑ च नो म॒घोन॑: पा॒हि सू॒रीन॑ने॒हस॑स्ते हरिवो अ॒भिष्टौ॑ ॥

English Transliteration

adha tvam indra viddhy asmān maho rāye nṛpate vajrabāhuḥ | rakṣā ca no maghonaḥ pāhi sūrīn anehasas te harivo abhiṣṭau ||

Pad Path

अध॑ । त्वम् । इ॒न्द्र॒ । वि॒द्धि । अ॒स्मान् । म॒हः । रा॒ये । नृ॒ऽप॒ते॒ । वज्र॑ऽबाहुः । रक्ष॑ । च॒ । नः॒ । म॒घोनः॑ । पा॒हि । सू॒रीन् । अ॒ने॒हसः॑ । ते॒ । ह॒रि॒ऽवः॒ । अ॒भिष्टौ॑ ॥ १०.६१.२२

Rigveda » Mandal:10» Sukta:61» Mantra:22 | Ashtak:8» Adhyay:1» Varga:30» Mantra:2 | Mandal:10» Anuvak:5» Mantra:22


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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अध) अनन्तर (नृपते-इन्द्र) मुमुक्षुओं के पालक परमात्मन् ! (त्वं वज्रबाहुः-अस्मान् विद्धि) तू ओज का वहन करनेवाला हमें जान कि हम तेरे उपासक हैं (मघोनः-नः-रक्ष च) अध्यात्मयज्ञवाले हम लोगों की रक्षा कर (हरिवः-ते-अभिष्टौ) हे दया-प्रसादवाले, तेरी अभिकाङ्क्षा में वर्तमान (अनेहसः सूरीन् पाहि) हम निष्पाप मेधावी उपासकों की रक्षा कर-अपना आनन्द प्रदान करके ॥२२॥
Connotation: - जो परमात्मा के उपासक पापरहित अध्यात्मयज्ञ करनेवाले होते हैं, वे परमात्मा की दया और प्रसाद के पात्र बनते हैं। परमात्मा उन्हें अपना आनन्ददान देकर उनकी रक्षा करता है ॥२२॥
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BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (अध) अनन्तरं (नृपते-इन्द्र) मुमुक्षूणां पालक परमात्मन् ! “नरो ह वै देवविशः” [जै० १।८९] (त्वं वज्रबाहुः-अस्मान् विद्धि) त्वमोजोवाहकः सन् खल्वस्मान् “वज्रं वा ओजः” [श० ८।४।१।२०] जानीहि यद् वयं तवोपासका इति (मघोनः-नः-रक्ष च) अध्यात्मयज्ञवतोऽस्मान् रक्ष “यज्ञेन मघवान्” [तै० सं० ४।४।८।१] (हरिवः-ते-अभिष्टौ-अनेहसः सूरीन् पाहि) हे दयाप्रसादवन् ! तवाभिकाङ्क्षायां वर्तमानान् निष्पापान् मेधाविन उपासकान् पालय स्वानन्ददानेन ॥२२॥