Go To Mantra

शाक्म॑ना शा॒को अ॑रु॒णः सु॑प॒र्ण आ यो म॒हः शूर॑: स॒नादनी॑ळः । यच्चि॒केत॑ स॒त्यमित्तन्न मोघं॒ वसु॑ स्पा॒र्हमु॒त जेतो॒त दाता॑ ॥

English Transliteration

śākmanā śāko aruṇaḥ suparṇa ā yo mahaḥ śūraḥ sanād anīḻaḥ | yac ciketa satyam it tan na moghaṁ vasu spārham uta jetota dātā ||

Pad Path

शाक्म॑ना । शा॒कः । अ॒रु॒णः । सु॒ऽप॒र्णः । आ । यः । म॒हः । शूरः॑ । स॒नात् । अनी॑ळः । यत् । चि॒केत॑ । स॒त्यम् । इत् । तत् । न । मोघ॑म् । वसु॑ । स्पा॒र्हम् । उ॒त । जेता॑ । उ॒त । दाता॑ ॥ १०.५५.६

Rigveda » Mandal:10» Sukta:55» Mantra:6 | Ashtak:8» Adhyay:1» Varga:17» Mantra:1 | Mandal:10» Anuvak:4» Mantra:6


Reads times

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यः) जो परमात्मा (शाक्मना शाकः) बल से अथवा शक्य कर्म करने के हेतु समर्थ है (अरुणः) तेजस्वी (सुपर्णः) उत्तम पालन करनेवाला (महः-शूरः) महान् शूरवीर है (सनात्) शाश्वतिक (अनीडः) अनेकदेशी-अनन्त-सर्वव्यापक (यत्-आ चिकेत) जो भलीभाँति जानता है (तत्-सत्यम्-इत्) वह सत्य ही होता है और सत्य ही जानता है (न मोघम्) व्यर्थ नहीं होता है, असत्य नहीं होता है (उत स्पार्हं वसु जेता) स्पृहणीय धन, मोक्षधन-आत्मा को बसानेवाले धन को जीतता है, प्राप्त करता है (उत दाता) हाँ, मुमुक्षुओं के लिए देता है ॥६॥
Connotation: - परमात्मा सृष्टि के रचने और जीवों को कर्मफल देने में सर्वथा समर्थ है। वह किसी एक नियत देश में नहीं, अपितु अनन्त है। वह शाश्वतिक है, सत्यस्वरूप है। उसके कार्य सत्य हैं, व्यर्थ अर्थात् असत्य नहीं हैं। अधिकारी मुमुक्षुओं को चाहने योग्य और बसाने योग्य मोक्ष धन को देता है ॥६॥
Reads times

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यः) यः खलु परमात्मा (शाक्मना शाकः) शक्मना बलेन यद्वा शक्येन कर्मणा शक्यकर्महेतुना “शक्म कर्मनाम” [निघ० २।१] शक्तः (अरुणः) तेजस्वी (सुपर्णः) सुष्ठु पालनकर्त्ता (महः-शूरः) महान् शूरवीरः (सनात्) शाश्वतिकः (अनीडः) अनेकदेशी-अनन्तः सर्वव्यापकः (यत्-आचिकेत) यत् समन्ताद् जानाति (तत्-सत्यम्-इत्) तत् सत्यं हि भवति सत्यं जानाति (न मोघम्) न व्यर्थं भवति (उत स्पार्हं वसु जेता) स्पृहणीयं धनं मोक्षधनं वासमभिभाविता रक्षिता (उत दाता) अपि मुमुक्षुभ्यो दाता च ॥६॥